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पीलीभीत में बाघ के हमले से किसान की मौत के बाद ग्रामीणों ने 16 घंटे किया चक्का जाम, फाड़ी वन दारोगा की वर्दी

Published: Sat, 29 Aug 2026 08:57 PM (IST)

पीलीभीत में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद ग्रामीणों ने 16 घंटे तक सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

पूरनपुर के रामनगर तिराहा पर जाम लगाए लोग

पूरनपुर के रामनगर तिराहा पर जाम लगाए लोग

HighLights

  1. बाघ हमले में किसान की मौत पर ग्रामीणों का आक्रोश।

  2. 16 घंटे तक रामनगर तिराहा पर शव रखकर प्रदर्शन।

  3. वन दारोगा की वर्दी फाड़ी, प्रशासनिक आश्वासन पर जाम खुला।

संवाद सहयोगी, पीलीभीत। बाघ के हमले में किसान की मौत से आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर उतर आए। उन्होंने हल्की वर्षा की परवाह की ना जंगल क्षेत्र के अंधेरे की। वे रामनगर तिराहा पर शव रखकर 16 घंटे धरना देते रहे। कई दिन से गांवों में बाघ विचरण की अनदेखी करने वाले वन अधिकारी शनिवार को वार्ता करने पहुंचे तो ग्रामीण हमलावर हो गए।

उन्होंने वन दारोगा राजेश कुमार को पीटा, वर्दी फाड़ दी। वन रेंजर को किसान की मौत का जिम्मेदार मानते हुए थाने में तहरीर दे दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाम खुल सका।

नेपाल सीमावर्ती शांतिनगर गांव के आसपास लखीमपुर खीरी क्षेत्र का सामाजिक वानिकी का जंगल है। ग्रामीणों ने बताया कि अक्सर वन्यजीव गांवों में पहुंच जाते हैं। एक बाघ कई दिनों से शांतिनगर व आसपास के गांवों में घूम रहा था। इसकी सूचना के बाद भी संपूर्णानगर वन रेंज (लखीमपुर खीरी) के वन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।

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ग्रामीणों को समझाने पहुंचे एसडीएम

शुक्रवार शाम को बाघ ने केले के खेत में काम कर रहे मुंशी प्रसाद को खा लिया। इससे आक्रोशित दर्जनों लोगों ने शाम छह बजे मुंशी प्रसाद का शव रामनगर तिराहा पर रखकर जाम लगा दिया। वे वन अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे थे, मगर कोई नहीं पहुंचा। रात में एसडीएम मयंक गोस्वामी उन्हें समझाने गए, लेकिन बात नहीं बनी।

सीमावर्ती क्षेत्र होने से उस रूट पर वाहनों का आवागमन ज्यादा नहीं था, फिर भी सतर्कता के दृष्टिगत पुलिस ने डायवर्जन कर दिया। शनिवार सुबह को जाम स्थल पर आसपास के कई गांवों के लोग भी पहुंच गए। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के एसडीओ मनोज कुमार तिवारी, संपूर्णानगर रेंज के वन दारोगा राजेश कुमार आदि अधिकारी वहां पहुंचे। बातचीत के दौरान उनकी ग्रामीणों की नोकझोंक होने लगी।

इतने में कुछ युवकों ने वन दारोगा पर हमला कर दिया। वह बचकर भागे तो वर्दी फाड़ दी। हंगामा, नारेबाजी होने लगी। इसकी जानकारी पर पहुंची तीन थानों की फोर्स ने वन अधिकारियों को वहां से निकाला। इसके बाद एसडीएम मयंक गोस्वामी दोबारा बातचीत करने पहुंचे।

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मुंशी प्रसाद के बेटे संजय ने आरोप लगाया कि संपूर्णानगर रेंजर ललित कुमार ने लापरवाही की। यदि वह समय रहते बाघ को जंगल में खदेड़ देते तो हमले में मुंशी प्रसाद की जान नहीं जाती। वन विभाग के संवेदनहीनता के कारण जनहानि हो रही है। उन्होंने रेंजर के विरुद्ध तहरीर दी, जिस पर एसडीएम ने कार्रवाई का आश्वासन देकर प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया।

सड़क पर जाम लगा रहे ग्रामीणों से वार्ता के लिए गए वन दारोगा पर हमला किया गया। भीड़ ने उनकी वर्दी भी फाड़ दी। बाघ के निगरानी में लापरवाही का आरोप गलत है। एक टीम उसकी गतिविधियों पर निगाह रखे हुए है।- ललित कुमार क्षेत्रीय वनाधिकारी, सामाजिक वानिकी प्रभाग, संपूर्णानगर।

मुंशी प्रसाद के स्वजन ने मुआवजा, आवास, नौकरी की मांग की है। उनके बेटे का वन वाचर के तौर नियुक्त किया जाएगा। दैवीय आपदा के तहत आवास व बाघ हमले में मुआवजा भी दिलाएंगे। वन अधिकारियों की लापरवाही की जांच संबंधित विभाग के अधिकारी करेंगे। रेंजर के विरुद्ध तहरीर भी दी गई है।- मयंक गोस्वामी, एसडीएम, पूरनपुर।

वन दारोगा के साथ मारपीट नहीं अभद्रता हुई है। रेंजर के विरुद्ध दी गई तहरीर पर जांच कर उनके विभाग के संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।- शरद कुमार, थाना प्रभारी