Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पीलीभीत के 12 बाघों को मिली 'उम्रकैद': इंसानी गलतियों की सजा काट रहे जंगल के राजा, दर्दनाक है वजह

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 08:46 PM (IST)

    पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर चुनौती बन गया है। इंसानी दखल के कारण 12 बाघों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघरों म ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक चित्र

    प्रतीकात्मक चित्र

    HighLights

    1. टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से अब तक 27 रेस्क्यू आपरेशन चलाए गए

    2. पांच शावकों समेत 24 बाघ और बाघिनों को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत। अपनी हरी-भरी वादियों और बाघों के बढ़ते कुनबे की बदौलत पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) आज पूरी दुनिया में ईको-टूरिज्म का नया सिरमौर बनकर उभर रहा है। टीएक्सटू और कैट्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान अपने नाम कर चुके इस टाइगर रिजर्व की धमक भले ही वैश्विक पटल पर गूंज रही हो, लेकिन सिक्का उछलते ही इसका दूसरा पहलू भी सामने आ खड़ा हुआ है।

    बाघों का कुनबा बढ़ने के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती ने प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। इस संघर्ष में जहां लगभग पांच दर्जन से अधिक इंसानों की जान जा चुकी है। जंगल के राजा को भी इसकी भारी कीमत अपनी आजादी खोकर चुकानी पड़ी है। कई बाघों को इस टकराव के चलते बाड़ों के पीछे उम्रकैद की सजा काटनी पड़ रही है।

    पीटीआर के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद से अब तक कुल 27 रेस्क्यू आपरेशन चलाए जा चुके हैं। इन जोखिम भरे अभियानों में पांच शावकों समेत कुल 24 बाघ-बाघिनों को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया है। इनके साथ ही छह तेंदुओं का भी रेस्क्यू किया गया।

    पकड़े गए इन बाघों में से 12 को तो स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी के बाद वापस उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। लेकिन अन्य 12 बाघ-बाघिनों की तकदीर में जंगल की स्वच्छंद हवा दोबारा नहीं लिखी थी। जंगल वापसी के लिए अयोग्य करार दिए गए इन बाघों को उम्रकैद की सजा देकर चिड़ियाघरों में भेज दिया गया।

    खबरें और भी

    छह बाघों को कानपुर, सात बाघों को लखनऊ और एक को गोरखपुर के प्राणी उद्यानों में शिफ्ट किया गया था। कभी खुले जंगल में बेखौफ दहाड़ने वाले ये वन्यजीव अब लोहे के जाल और ऊंची चहारदीवारी के पीछे अपनी जिंदगी के बाकी बचे दिन गिनने को मजबूर हैं। चिड़ियाघरों में उम्रकैद काट रहे इन बाघों में पीटीआर के कुछ बेहद चर्चित नाम भी शामिल रहे हैं।

    कभी पीटीआर में अपनी दहशत का पर्याय रहा बाघ केसरी रेस्क्यू के बाद गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। बाड़े में कैद रहने के दौरान बीमारी के चलते उसकी मौत हो चुकी है। बीते वर्ष कानपुर प्राणी उद्यान में भेजी गई इंटरनेट पर चर्चित आदमखोर बाघिन मिठ्ठी इन दिनों वहां दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सिकुड़ते जंगल और बाघों के प्राकृतिक आवास में बढ़ता इंसानी दखल इस संघर्ष का मुख्य कारण है। जब तक वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कारिडोर और उनके पर्यावास का दायरा नहीं बढ़ेगा तब तक इन परिस्थितियों पर लगाम लगाना मुश्किल है।

    यह भी पढ़ें- पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर बड़ा फैसला: अब 575 वर्ग किमी में लागू होंगे सख्त नियम, जानें आप पर क्या होगा असर

     

    यह भी पढ़ें- सुपरस्टार 'रॉकेट' गायब, फिर भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की लगी कतार; इन 13 नन्हें उस्तादों ने जीता दिल