भोजन ढूंढ़ने की आदत छोड़ रहे वन्यजीव, सड़क पर भोजन की आस में बैठते हैं बंदर, DFO की चेतावनी के बाद PTR में सख्ती
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मार्गों पर लोगों द्वारा वन्यजीवों को भोजन खिलाना उनके लिए खतरा बन रहा है, जिससे वे ...और पढ़ें

पीटीआर की माला रेंज से गुजरने वाले मार्ग किनारे बैठे बंदर। जागरण
सृजित अवस्थी, पीलीभीत। पीटीआर से गुजरने वाले मार्गों पर एक परंपरा बेहद आम होती जा रही है। यहां से गुजरने वाले राहगीर धार्मिक परंपरा व परोपकार भाव में सड़क पर मौजूद बंदरों को भोजन डालते हैं। उस वक्त तो जीव को भोजन देना आत्म-संतुष्टि प्रदान करता है।
मगर यह परोपकार बंदरों समेत कई जीवों की आत्मनिर्भरता को कम कर रहा है। इस परंपरा के कारण वन्यजीव अपने मूल स्वभाव को खो रहे हैं। वहीं, आसान भोजन की आस में बैठे बंदर कई बार लोगों पर हमलावर हो जाते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व करीब 730 वर्ग किमी में फैला विशाल वन क्षेत्र है। इस विशाल वनक्षेत्र से हो कर कई दर्जनों छोटे-बड़े मार्ग निकलते हैं। इसमें पीलीभीत-माधोटांडा, पीलीभीत-पूरनपुर, माधोटांडा खटीमा मार्ग सबसे प्रमुख हैं।
इन मार्गों पर कई बार लोगों कोे बाघ, भालू समेत तमाम वन्यजीवों की चहलकदमी देखने को मिलती है। वहीं, पूरनपुर व माधोटांडा मार्ग पर दिन के समय सड़क किनारे सैकड़ों बंदर दिखाई देते हैं। यह बंदर अचानक ही सड़क पर आना शुरु नहीं हुए।
इसके पीछे वर्षों से चली आ रही परंपरा है। कई बार मार्ग से गुजरते हुए व कई बार विशेष रूप से इसके लिए जंगल में जा कर बंदरों व हिरण आदि जीवों को फल, चने, गुड़ व अनाज से बने खाद्य पदार्थ फेंकते है। गन्ना पेराई सत्र के दौरान तो हालात और भयावह हो जाते हैं।
इस परंपरा का भाव भले ही गलत न हो, लेकिन इसके परिणाम दिन पर दिन भयावह होते जा रहे हैं। आसान भोजन मिलने की आदत के कारण बंदर सड़क किनारे दिनभर भोजन का इंतजार करते हैं।
कई बंदरों का झुंड लोगों के हाथ में पालीथीन देखकर हमलावर हो जाता है। जिससे बचने के कारण बाइकसवार हादसों का शिकार हो जाते हैं। वहीं, चार पहिया वाहन भी सड़क पर बैठे बंदरों को बचाने के कारण अनियंत्रित हो जाते हैं। बीते वर्ष एक स्कूल वैन इसी कारण पलट गई थी।
वनमार्ग ही नहीं किसी भी जगह जानवरों को खाना डालना उनके लिए ही खतरनाक साबित होता है। आसान भोजन मिलने से जानवर को उसकी आदत हो जाती है। जिस कारण वे आबादी में घरों का रुख करते हैं। इससे जानवरों में अपना भोजन ढूंढ़ने की क्षमता कम होती है। भोजन न मिलने पर वे उग्र हो सकते हैं। वनमार्गों की बात करें, तो यहां बंदरों को खाना डालना न केवल उनके व्यवहार बल्कि पूरे वनतंत्र के लिए खतरनाक होता है। कई बार बंदरों व अन्य छोटे जानवरों के शिकार के लिए तेंदुए आदि बाहर आ सकते हैं। लोगों से अपील है कि ऐसा न करें, ऐसा करते पाए जाने पर जुर्माने का प्रावधान है। इस ओर लोगों को स्वयं ही जागरुक होने की आवश्यकता है।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
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