द्वापर युग में यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का साक्षी स्थल अजगरा... बनेगा बौद्धिक विमर्श का केंद्र, संकलित होंगे प्रश्न और तर्क
अजगरा, जो यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का साक्षी है, अब प्रतापगढ़ प्रशासन के प्रयासों से बौद्धिक विमर्श का वैश्विक केंद्र बनेगा। 'द ...और पढ़ें

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का साक्षी स्थल प्रतापगढ़ स्थित अजगरा का प्राचीन सरोवर। जागरण
HighLights
प्रतापगढ़ प्रशासन का प्रयास कि यह पावन स्थल सबका ध्यान करे आकर्षित
नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने की भी है यह बड़ी कोशिश
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के साक्षी द्वापर युग के अजगरा को केवल मेला से नहीं पहचाना जाए, केवल संग्रहालय तक इसकी चर्चा न हो। इस स्थल को आने वाले दिनों में बहस, संवाद और बौद्धिक विमर्श का मुख्य केंद्र बनाया जाए। इस स्तर पर इसे विकसित किया जाए कि दुनिया का ध्यान खिंचे।
इस सोच के साथ प्रतापगढ़ प्रशासन ने द ग्रेट अजगरा डिबेट में सामने आए बेबाक तर्कों-वितर्कों, विचारों व सुझावों का दस्तावेजीकरण भी शुरू कर दिया है। इसे अजगरा आर्काइव में संकलित व संरक्षित किया जा रहा है। महोत्सव के बाद इस काम में और तेजी लाई जाएगी।
अजगरा को एक गांव की पहचान से निकालकर वैश्विक स्वरूप देने का एक बड़ा कदम भी अजगरा महान संवाद का ही स्वरूप है।
उस प्रश्नगत विरासत को आज के दौर से कनेक्ट करने की यह नई सोच जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय की है। उन्होंने यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के बारे में तो पढ़ रखा था, लेकिन जिले में आने के बाद उनको यह पता चला कि पौराणिक स्थल अजगरा प्रतापगढ़ में है।
दैनिक जागरण से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ पोस्टिंग होने पर जब यहां की विरासत से परिचय करने लगा तो अजगरा जाने की इच्छा और प्रबल हो उठी। स्थल पर जाकर देखा तो मन में एक कार्ययोजना ने जन्म लिया। लगा कि यह स्थल साधारण नहीं हो सकता। यहां बहुत संभावनाएं हैं। यहां मेला तो है, पर इसकी मूल आत्मा यानी संवाद की परंपरा विलुप्त हो गई है। इसे जीवित किया जाना चाहिए।
नंबर गेम
1,427 प्रतिभागियों की सहभागिता
08 लोग फाइनल में पहुंचे
17 सितंबर को सजेगा खुला मंच।
वह कहते हैं- दशहरा पर दशानन के पुतले को जलाने की परंपरा है। दीवाली पर दीये हजारों साल से जलते आ रहे हैं तो फिर संवाद का क्रम कैसे छूट गया/B?/B डिबेट के जरिए हमें वक्ता नहीं, चिंतक को सामने लाना है।
जिलाधिकारी ने इसी को ध्यान में रखकर पूरे जिले में खुला संवाद कराया। इसमें महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद की परंपरा को आधुनिक लोकतांत्रिक विमर्श से जोड़ा जाने लगा। तर्क व संवाद में नए-नए प्रश्न उभरे। प्रतिभागी सत्य-असत्य, कानून-नैतिकता के साथ न्याय, करुणा, मानवीय स्वतंत्रता और तकनीक से संबंधित प्रश्नों पर अपनी राय रखे।
इसमें जेन-जी के भी विचार आए और उम्रदराज लोगों के ज्ञान व अनुभव भी शब्दों में फूटे। शहर से गांवों तक ज्ञान की प्रखरता ने लोगों को द्वापर युग से भी जोड़ा। लोग चिंतन करने पर विवश हुए कि वह कौन से यक्ष प्रश्न थे, जिनके उत्तर युधिष्ठिर के अलावा उनके अन्य भाई नहीं दे सके थे।
अब वैश्विक पटल पर होगा अजगरा का 'अभिषेक'
अजगरा में संवाद की परंपरा जिले तक ही नहीं रहेगी। इसे पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। डीएम अभिषेक पांडेय की सोच व तैयारी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने बताया कि वह महोत्सव के बाद द ग्रेट अजगरा डिबेट में प्रदेश के हर जिले की सहभागिता कराने का प्रस्ताव शासन को भेजेंगे। इसके बाद हर राज्य में विस्तार होगा। बाद में प्रयास होगा कि वह दिन भी आए, जब दुनिया के हर देश से कोई न कोई प्रतिभागी यहां आकर डिबेट का हिस्सा बने। डीएम ने अजगरा की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निर्झर प्रतापगढ़ी के जज्बे और समर्पण की सराहना भी की।
गोरखपुर निवासी को अपना सा लगा बेल्हा
डीएम अभिषेक पांडेय मूलरूप से गोरखपुर शहर के रहने वाले हैं। वह 2016 बैच के आइएएस हैं। वह बताते हैं कि प्रतापगढ़ अच्छी सोच वालों व प्रतिभाशाली लोगों का जिला है। यहां परंपरा है, सांस्कृतिक समृद्धि है। यहां आने पर बोली-भाषा से भी अपना सा महसूस हुआ। इसका अंदाजा इस बात से भी लगता है कि उनके पास देश-विदेश में चयनित होने वाले प्रतापगढ़ के अनेक मेधावियों के चरित्र प्रमाण पत्र बनाने के आवेदन भारी संख्या में आते रहते हैं।
प्राचीन सरोवर बनेगा प्रश्नोत्तरी का साक्षी
अजगरा पर संवाद हो चुका है और बेला आने वाली है महामुकाबले की। इसमें 17 सितंबर को शाम पांच बजे से अजगरा अष्ट को एक बार फिर उसी स्थल पर सरोवर के किनारे अपना कौशल हजारों लोगों के समक्ष साबित करने की कड़ी चुनौती से गुजरना होगा, जहां कभी युधिष्ठिर ने अपनी प्रखरता व बौद्धिकता के आगे यक्ष को संतुष्ट किया था।
हर वर्ष की पड़ी नींव
अजगरा डिबेट अब हर साल होगा। इसकी कमेटी बनी है, जो यह आयोजन करती रहेगी। मंचीय बहसों को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की योजना है। हर वर्ष समाज के सामने मौजूद किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को वर्ष का प्रश्न भी घोषित किया जाएगा।
पहले विजेता तो युधिष्ठिर हैं
यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देकर अजगरा में पहले विजेता तो युधिष्ठिर ही बने थे। संवाद की परंपरा तो तब की है। डीएम अभिषेक पांडेय बताते हैं कि यह डिबेट तो प्रश्नोत्तरी सीजन-2 है। परिणाम आने के बाद जो प्रथम विजेता होगा, शिलापट पर उसका नाम सीजन-2 का प्रथम विजेता लिखा जाएगा, प्रथम पर युधिष्ठिर का नाम दर्ज किया जाएगा।
अजगरा महोत्सव का प्रभारी मंत्री आज करेंगे शुभारंभ
यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल अजगरा में तीन दिवसीय महोत्सव और मेला ऋषि पंचमी पर मंगलवार से शुरू हो रहा है। दोपहर 2:00 बजे प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण राज्य मंत्री तथा प्रतापगढ़ के प्रभारी मयंकेश्वर शरण सिंह इसका उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर तैयारी जमकर है। मंच और पंडाल सजा है। इस बार अजगरा महोत्सव में नवाचार के तौर पर दी ग्रेट अजगरा डिबेट भी होगा। इसमें अजगरा अष्ट के रूप में आठ प्रतिभागी चुने जा चुके हैं। इनके बीच फाइनल डिबेट महोत्सव के अंतिम दिन 17 सितंबर को शाम 5:00 बजे से रखा गया है।
