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    इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सहमति से बने संबंध शादी टूटने पर दुष्कर्म नहीं

    Updated: Tue, 26 May 2026 10:35 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल शादी न होने पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मुरादाबाद के एक ...और पढ़ें

    हर टूटे रिश्ते को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: हाई कोर्ट।

    हर टूटे रिश्ते को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: हाई कोर्ट।

    HighLights

    1. आपसी सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं, शादी न होने पर।

    2. दुष्कर्म तभी जब शुरुआत से शादी का झूठा वादा हो।

    3. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही रद्द की।

    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल शादी न होने या रिश्ता टूट जाने के आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने मुरादाबाद से जुड़े मामले में निचली अदालत द्वारा जारी समन और पूरी आपराधिक कार्यवाही को इस टिप्पणी के साथ रद कर दिया है।

    पीड़िता ने कपिल सोम और एक अन्य व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, शोषण करने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाया था।

    अदालत ने कहा कि किसी मामले को दुष्कर्म तभी माना जा सकता है, जब यह साबित हो कि आरोपित की शुरुआत से ही शादी करने की कोई मंशा नहीं थी और उसने धोखे से संबंध बनाए।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘शादी का वादा टूटना’ और ‘शुरुआत से झूठा वादा करना’ दोनों अलग स्थितियां हैं। फैसले में कहा गया कि लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते के बाद उत्पन्न मतभेदों को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।

    अदालत ने यह भी माना कि मामले में जातिसूचक टिप्पणी के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और ऐसी परिस्थितियों में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

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