Allahabad HC : विवाह शोषण का लाइसेंस नहीं, दुराशय से याचिका दाखिल करने वाले पर 15 लाख रुपये का हर्जाना लगाया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी से गुजारा भत्ता लेने वाले अधिवक्ता पति रंजीत सिंह पर 15 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि विवाह शोषण का लाइसे ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
वसूली तक संपत्ति बेचने पर रोक,कहा- तलाक का मामला नियमानुसार निपटाया जाए
जिलाधिकारी इटावा को निर्देश- कमेटी गठित कर याची की संपत्ति की जांच कराएं
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी के वेतन खाते से लोन लेने के बाद खुद को बेसहारा तथा बेरोजगार बताकर पांच हजार रुपये गुजारा भत्ता ले रहे अधिवक्ता पति रंजीत सिंह की दुराशयता के साथ दाखिल याचिका 15 लाख रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। यह टिप्पणी भी की है कि विवाह शोषण का लाइसेंस नहीं हो सकता।
कोर्ट ने याची पति को छह सप्ताह में हर्जाना राशि का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के जरिए पत्नी को देने का निर्देश देते हुए कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो जिलाधिकारी इटावा तीन माह में हर्जाना वसूल कर महानिबंधक के पास जमा कराएं। हर्जाना वसूली नहीं होने तक चल -अचल संपत्ति बेचने पर रोक लगा दी है। याची कोई संपत्ति नहीं बेच सकेगा।
कोर्ट ने परिवार अदालत प्रयागराज को तलाक केस का नियमानुसार निपटारा करने का भी निर्देश दिया है। कहा है कि गुजारा भत्ता आदेश की वापसी संबंधी पत्नी की अर्जी चार सप्ताह में तय की जाए। जिलाधिकारी इटावा को कमेटी गठित कर याची की चल अचल संपत्ति की जांच कराने का आदेश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने रंजीत सिंह की याचिका पर दिया है।
परिवार अदालत इटावा में लंबित गुजारा भत्ता दिलाने संबंधी अर्जी शीघ्र तय करने के लिए समादेश जारी करने की मांग याचिका में थी। मुकदमे से जुड़े तथ्यों के अनुसार याची व प्रतिवादी की शादी 18 मई 2019 को हुई थी। उस समय दोनों ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। विवाह उपरांत नीतू की इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त निजी सचिव (एपीएस) पद पर नौकरी लग गई। मनमुटाव बढ़ने लगा।
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याची का कहना था कि वह बेरोजगार है। इसलिए पत्नी उसे अपमानित करती रहती है। दहेज उत्पीड़न केस व कार उठा ले जाने के आरोप में महिला थाना व कैंट थाना प्रयागराज में एफआइआर दर्ज करा दी गई है। तलाक का केस दायर किया है। याची ने भी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत केस किया है। साथ ही बीएनएसएस की धारा 144 के तहत भरण-पोषण का दावा किया है। इसमें परिवार अदालत ने पांच हजार प्रतिमाह गुजारा भत्ता व 10 हजार वाद खर्च दिलाया है।
पत्नी की तरफ से याची पर झूठा हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को गुमराह करने तथा अधूरे तथ्य को लेकर दावा करने का आरोप लगाया गया। कहा कि उसका एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड याची के पास है। उसने दुरुपयोग कर उसके वेतन खाते से क्रमशः 11,50000 एवं 13,56000 रुपये का लोन ले लिया है। बहाना बनाया कि प्लाट खरीदा है, लेकिन दिखाया नहीं। उसके खाते से हर महीने 26,020 रुपये कटौती हो रही है।
याची दहेज में मिली कार और सारा भी सामान उठा ले गया। कार वापस मांगने पर 10 लाख रुपये मांगे गए। प्रतिवादी का कहना है कि पति मानसिक व शारीरिक प्रताडना दे रहा है। झूठा हलफनामा दाखिल कर गुजारा भत्ता का आदेश करा लिया। इसकी वापसी की अर्जी लंबित है। कोर्ट ने अमृता राय मिश्रा को न्यायमित्र नियुक्त किया। उन्होंने सच्चाई सामने रख दी। याची तलाक को राजी हो गया, किंतु कोर्ट ने झूठा हलफनामा देने व बिना सदाशयता के याचिका दायर करने पर 15 लाख रुपये का हर्जाना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी।