इस्लाम अपनाने वाली दो युवतियों को अदालत में 6 अगस्त को पेश करें, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस्लाम अपनाने वाली दो युवतियों को 6 अगस्त 2026 को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। युवतियों के पिता पर उन्हें अवैध रूप से ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
आरोप है कि पिता ने उन्हें अवैध रूप से घर में कैद कर रखा है
अदालत ने कहा- व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप अस्वीकार्य
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस्लाम अपनाने वाली दो युवतियों को छह अगस्त 2026 को अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि उनके पिता ने उन्हें अवैध रूप से घर में कैद कर रखा है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने कुंवर सुल्तान अली व दो अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। मामला आगरा का है।
याची के अधिवक्ता अली बिन सैफ और कैफ हसन ने अदालत को बताया कि बताया कि यह निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अंतरात्मा की आवाज पर आधारित है। इसलिए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के प्रावधान मामले में लागू नहीं होते। घर में कैद की गई युवतियों के नाम क्रमश: दिव्या भाटिया उर्फ जोया दिया भाटिया, 20 वर्ष और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया, 35 वर्ष है। उन्हें भी याची बनाया गया है।
याचीगण का दावा है कि युवतियों ने बिना किसी दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के स्वेच्छा से हिंदू धर्म त्यागकर इस्लाम स्वीकार किया है। अपनी पसंद के व्यक्तियों से विवाह करने का निर्णय भी स्वतंत्र इच्छा से लिया है। याचीगण के अनुसार युवतियों के पिता अनिल कुमार भाटिया ने चार मई 2025 को आगरा के सदर बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से दोनों को घर में अवैध रूप से निरुद्ध कर दिया गया, इससे उनकी स्वतंत्रता पर रोक लग गई।
कोर्ट ने कहा, ‘यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही हैं तो यह संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन होगा।’ पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि दोनों वयस्क हैं और अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने में सक्षम हैं। कोर्ट के अनुसार अदालत का सर्वोपरि दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित युवतियां मर्जी से रह रही हैं या किसी अवैध हिरासत का शिकार हैं। इसलिए वह सीधे बातचीत कर युवतियों की इच्छा और वर्तमान स्थिति जानेगा।
खबरें और भी
कोर्ट ने राज्य सरकार और पिता को निर्देश दिया कि वे निर्धारित तिथि पर दोनों युवतियों को कोर्ट में उपस्थित कराएं। यदि ऐसा नहीं किया गया तो अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।