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'झूठों का पुलिंदा पुलिस, SHO की सैलरी से दो 65 हजार रुपये मुआवजा'; देवरिया SP पर भड़का इलाहाबाद HC

Published: Thu, 10 Sep 2026 09:16 AM (IST)Updated: Thu, 10 Sep 2026 09:50 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने देवरिया पुलिस को अवैध हिरासत पर फटकारा।

  2. पुलिस को 'झूठों का झुंड' कहकर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की।

  3. चार याचियों को 65 हजार रुपये मुआवजा, थानाध्यक्ष के वेतन से वसूली।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने महेंद्र गौड़ की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान एसपी और थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की। मौखिक टिप्पणी में कोर्ट ने उन्हें ‘झूठों का झुंड’ तक कह दिया।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि चार लोगों को 13 से 24 अप्रैल के बीच गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इनमें कुछ को करीब 10 दिन और अन्य को इससे कम अवधि तक थाने में रखा गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध न होने पर सवाल उठाया।

थानाध्यक्ष की ओर से बताया गया कि संबंधित अवधि में बिजली नहीं थी और जनरेटर भी खराब था, इसलिए रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी। कोर्ट ने इस दलील को अविश्वसनीय बताते हुए खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रत्येक थाने में सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे चालू रहना और फुटेज का बैकअप सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

सीसीटीवी और बैकअप व्यवस्था का काम न करना पुलिस अधीक्षक की ओर से कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने चारों याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसमें अर्चना गौड़, नंदिनी गौड़ और इन्नी को 20-20 हजार रुपये तथा महेंद्र गौड़ को पांच हजार रुपये दिए जाएंगे।

मुआवजे की राशि थानाध्यक्ष के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले जून में हाई कोर्ट ने अवैध हिरासत को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक अवैध रूप से हिरासत में रखने पर 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा। यह राशि दोषी पाए गए मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी।

गाजियाबाद निवासी चंद्रपाल पाल सिंह व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया था। साथ ही, डीजीपी को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को इस संबंध में परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था।

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