विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'मथुरा-वृंदावन में भीड़ प्रबंधन विज्ञान पर आधारित नहीं', इलाहाबाद हाई कोर्ट की गंभीर खामियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 01 Aug 2026 08:51 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में भीड़ प्रबंधन को विज्ञान पर आधारित न होने पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में भीड़ प्रबंधन की खामियों पर टिप्पणी की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में भीड़ प्रबंधन की खामियों पर टिप्पणी की।

HighLights

  1. कहा- धार्मिक आयोजनों, तीर्थस्थलों पर होने वाली भगदड़ भीड़ के व्यवहार-विज्ञान की अनदेखी का परिणाम

  2. मथुरा, अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट जैसे शहरों को अन्य साधारण शहरों के समान नहीं आंका जा सकता

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मथुरा-वृंदावन में भीड़ प्रबंधन की गंभीर खामियों पर ध्यान केंद्रित किया है। कहा है कि यह विज्ञान पर नहीं आधारित है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कहा, धार्मिक आयोजनों और तीर्थस्थलों पर होने वाली भगदड़ जैसी घटनाएं केवल प्रशासनिक चूक या ढांचागत कमी का नतीजा नहीं हैं, बल्कि भीड़ के व्यवहार-विज्ञान की गहरी अनदेखी का परिणाम हैं। कोर्ट ने कुछ सिफारिशें भी की हैं।

‘मथुरा में भीड़ प्रबंधन महज यातायात प्रबंधन तक सीमित कर दिया गया है, जो भीड़ के व्यवहार-विज्ञान की मौलिक गलतफहमी दर्शाता है। धार्मिक भीड़ राजनीतिक रैली या खेल आयोजन की भीड़ से भिन्न होती है । यह स्वतः नियंत्रित तो होती है पर भावनात्मक तल्लीनता के कारण घनत्व बढ़ने पर खतरे के प्रति कम सजग रहती है।’
- इलाहाबाद हाईकोर्ट

पर्वों पर मथुरा-वूंदावन में हुई भगदड़

अदालत ने कहा, हाल के वर्षों में होली और अन्य पर्वों पर मथुरा-वृंदावन में भगदड़ हुई। लोग घायल हुए और जानें गईं। जिलाधिकारी मथुरा, उपाध्यक्ष वृंदावन विकास प्राधिकरण, नगर आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कोर्ट ने विस्तृत हलफनामा तलब किया था। प्राधिकरण के हलफनामे के अनुसार पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) में अतिक्रमण के खिलाफ 2,453 नोटिस जारी हुए, इनमें 700 ध्वस्तीकरण आदेश पारित हुए, लेकिन केवल 323 पर अमल हो सका। 104 संपत्तियां सील की गईं जबकि 212 मामलों में समझौता हो गया।

6-7 व्यक्ति/वर्ग मीटर पर दम घुटने जैसी स्थिति

कोर्ट ने आंकड़ों को ‘हिमशैल का सिरा’ बताया। कहा, असली समस्या कहीं अधिक गंभीर है। भीड़ विज्ञान अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा- प्रति वर्ग मीटर 4-5 व्यक्तियों के घनत्व पर व्यक्ति का स्वयं का नियंत्रण खत्म हो जाता है और 6-7 व्यक्ति प्रति वर्ग मीटर पर दम घुटने जैसी स्थिति (कम्प्रेसिव एस्फिक्सिया) की आशंका होती है। भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों पर ऐसा अक्सर दिखता है।

मथुरा शहर के विकास का खाका 10 वर्षों के लिए 

मथुरा शहर के विकास का खाका महज 10 वर्षों के लिए तैयार किया गया है, जबकि चंडीगढ़, नई दिल्ली और जयपुर जैसे शहर दशकों पहले दीर्घकालिक दूरदृष्टि के साथ बसाए गए। मथुरा, अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे शहरों को अन्य साधारण शहरों के समान नहीं आंका जा सकता।

अनियमितता रोकने को कड़े कानूनों की आवश्यकता 

कोर्ट की राय में तीर्थनगरों में अवैध निर्माण भू-माफिया, बिल्डर और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ से उपजी संगठित अनियमितता है, जिसे रोकने के लिए कड़े कानूनों से ज्यादा मजबूत और निष्पक्ष संस्थागत इच्छाशक्ति चाहिए। अपने आदेश की प्रति कोर्ट ने मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष और केंद्रीय उच्च शिक्षा सचिव को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि सिफारिशों पर आगे कार्रवाई हो सके। 

यह है प्रकरण की पृष्ठभूमि

याची स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज ने वृंदावन स्थित आश्रम के ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस को कमिश्नर के समक्ष चुनौती दी थी, जिसे चार सितंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। तब हाई कोर्ट की शरण ली। कोर्ट को बताया गया कि ‘पिक एंड चूज’ है, 23 अवैध निर्माणों में केवल चुनिंदा पर कार्रवाई की गई। कोर्ट ने गुण-दोष के आधार पर याचिका निस्तारित करते हुए कहा,याची प्राधिकरण के समक्ष पुन: अपना पक्ष रखे। प्राधिकरण, सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2024 के आदेश के अनुपालन में जारी सरकारी परिपत्रों के आलोक में निर्णय लेगा। तब तक कमिश्नर का आदेश स्थगित रहेगा।

राज्य सरकार से अदालत की महत्वपूर्ण सिफारिशें

- विश्वविद्यालयों में शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन, सिविल इंजीनियरिंग और मनोविज्ञान जैसे पाठ्यक्रमों में भीड़-व्यवहार विज्ञान को औपचारिक विषय के रूप में शामिल किया जाए।
- आइआइटी कानपुर या आइआइटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के सहयोग से भीड़ विज्ञान और शहरी जोखिम प्रबंधन का "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" स्थापित हो। उत्तर प्रदेश के लिए सांविधिक आयोग बनाने की संभावना तलाशी जाए।
- हर बड़े सार्वजनिक आयोजन में प्रमाणित भीड़-सुरक्षा विशेषज्ञों की सहभागिता अनिवार्य की जाए। प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद जैसी संस्थाएं मास्टर प्लानिंग और भवन उपनियमों में भीड़ विज्ञान को शामिल करें।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।