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मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों की भर्ती न होने पर हाई कोर्ट सख्त; कहा- कृत्रिम आपात स्थिति बनाकर हो रही संविदा नियुक्तियां

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 05 Nov 2026 05:36 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों के रिक्त पदों पर भर्ती न होने को गंभीरता से लिया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने प्रोफेसरों की भर्ती न होने पर गंभीरता दिखाई।

  2. रिक्त पदों पर संविदा नियुक्तियों को 'कृत्रिम आपात स्थिति' बताया।

  3. राज्य सरकार, लोक सेवा आयोग को 25 नवंबर तक शपथपत्र देने का आदेश।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों में प्रोफेसरों के स्वीकृत पदों पर भर्ती न होने को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की एकलपीठ ने कहा है कि नियमित पदों को न भरकर ‘कृत्रिम आपात स्थिति’ बनाई जा रही है, जिससे संविदा नियुक्तियां होती हैं। कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है।

बताया गया कि 30 जनवरी की अधिसूचना के जरिये ‘उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड’ के गठन का निर्णय हुआ था, लेकिन 10 महीने से अधिक बीतने के बाद भी बोर्ड नहीं बना। नियुक्ति की जिम्मेदारी अब भी लोक सेवा आयोग के पास है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार व लोक सेवा आयोग से अगली सुनवाई की तारीख 25 नवंबर तक शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा।

चेतावनी दी कि तय तारीख तक शपथपत्र दाखिल न होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित आदेश पारित किए जाएंगे। कोर्ट ने टिप्पणी कि कई कालेजों में विभागाध्यक्ष जैसे अहम पद संविदा कर्मियों या असिस्टेंट/एसोसिएट प्रोफेसरों के भरोसे हैं, जबकि प्रोफेसर के पद स्वीकृत हैं। यह मेडिकल कालेजों के गिरते मानकों का एक कारण है।

वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार रिक्तियां न भरने के मूल मुद्दे से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल कालेजों में प्रोफेसरों के कुल 517 पद स्वीकृत हैं। इनमें 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 75 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने हैं।

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सीधी भर्ती के 108 पदों में से केवल 26 पर ही तैनाती है। यानी, सिर्फ सीधी भर्ती के ही 75 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। राज्य सरकार ने लोक सेवा आयोग को 35 पदों की मांग भेजी थी, लेकिन अब तक इसका विज्ञापन ही जारी नहीं हो सका। याचिका दायर होने के बाद 18 अगस्त को 44 पदों का विज्ञापन निकाला गया, जिसकी चयन प्रक्रिया चल रही है।

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