UP के DIOS के गलत आदेशों पर इलाहाबाद HC ने जताई नाराजगी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा 24 अगस्त को तलब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानाचार्यों के वेतन भुगतान संबंधी मामलों में डीआईओएस द्वारा बार-बार गलत आदेश पारित करने पर कड़ी ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
कानपुर के रहने वाले स्मित तिवारी की याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने निर्देश दिए
प्रधानाचार्य पद के वेतन भुगतान से जुड़े मामले में बार-बार गलत आदेश पारित करने का मामला
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानाचार्य पद के वेतन भुगतान से संबंधित मामलों में जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) द्वारा बार-बार गलत आदेश पारित करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने इसे ‘गंभीर और अवमाननापूर्ण’ करार दिया है।
अदालत ने याचिका की सुनवाई की
कानपुर के स्मित तिवारी की याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने निदेशक शिक्षा (माध्यमिक) को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तिथि 24 अगस्त को दोपहर दो बजे उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि अधिकारी अदालत के आदेशों और वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में तय कानूनी स्थिति की खुलेआम अवहेलना क्यों कर रहे हैं।
याची के अधिकवक्ता का तर्क
याची के अधिवक्ता अनुराग शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि पहले अदालत ने वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में निर्धारित कानून के आधार पर डीआईओएस को आदेश दिया था कि वह याची को प्रधानाचार्य पद का बकाया और वर्तमान वेतन तीन माह में दें। हालांकि डीआईओएस-2, कानपुर नगर ने एकलपीठ के उस पुराने फैसले के आधार पर आदेश पारित कर दिया, जिसे स्पेशल अपील में पहले ही संशोधित किया जा चुका था।
अदालत के समक्ष पूर्व में भी आ चुके ऐसे मामले
अदालत ने कहा कि उसके समक्ष ऐसे कई मामले आ रहे हैं जहां विभिन्न डीआईओएस के निर्देशों के बावजूद गलत आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे पहले प्रमोद कुमार एवं अन्य मामलों में भी अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था और सुनील कुमार मिश्रा मामले में भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया गया था।
