'सिर्फ 2 केस में जिला बदर करना जल्दबाजी', इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कौशांबी DM का आदेश किया रद; कमिश्नर को दिए निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि केवल दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी को गुंडा घोषित कर जिला ...और पढ़ें
-1791927345021_m.webp)
HighLights
दो आपराधिक केसों पर जिला बदर जल्दबाजी।
हाई कोर्ट ने कौशांबी DM के आदेश पर रोक लगाई।
कमिश्नर प्रयागराज को दो माह में अपील निस्तारित करने का निर्देश।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि केवल दो आपराधिक केसों के आधार पर किसी को गुंडा घोषित कर जिला बदर करने का आदेश जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कमिश्नर, प्रयागराज मंडल को अपील दो महीने में निस्तारित करने का निर्देश देते हुए तब तक जिला बदर के आदेश पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने कौशांबी के सनित यादव की याचिका पर दिया है। याची ने कौशांबी के जिलाधिकारी द्वारा 14 जुलाई को पारित जिला बदर आदेश और कमिश्नर प्रयागराज द्वारा 18 अगस्त को स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 3(3) के तहत छह माह के लिए जिला बदर और धारा 6 के तहत अपील में स्टे न देने को रद करने की मांग की गई थी।
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही शुरू कर जिलाबदर कर दिया गया। इसके खिलाफ कमिश्नर के समक्ष अपील लंबित है, लेकिन स्थगन के लिए दिया गया प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। एजीए ने बताया कि वर्तमान में याची के खिलाफ दो केस दर्ज हैं। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि दो आपराधिक केसों के आधार पर ही जिलाधिकारी ने याची को गुंडा घोषित किया है।
याची की अपील अभी कमिश्नर के समक्ष लंबित है, ऐसे में इस कोर्ट के लिए आदेशों की वैधता पर कोई राय व्यक्त करना उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि कमिश्नर लंबित अपील उसके आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से दो महीने के भीतर तय करें। तब तक जिलाधिकारी के आदेश का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।
