डीएलएड छात्रों को अतिरिक्त अवसर देने पर इलाहाबाद HC ने रोक लगा दी है, राज्य सरकार ने की थी विशेष अपील
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीएलएड छात्रों को अतिरिक्त मौका देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें तीन बार फेल हुए छ ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
एकलपीठ के आदेश पर खंडपीठ ने लगाई रोक, राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार की
तीन बार विफल छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए‘अंतिम अतिरिक्त अवसर’ देने का निर्देश था
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने डीएलएड छात्रों को राहत देने से इन्कार करते हुए एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है। इसमें तीन बार विफल छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए‘अंतिम अतिरिक्त अवसर’ देने का निर्देश दिया गया था।
अतिरिक्त मौका देना वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन
न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि नियमों से परे जाकर अतिरिक्त मौका देना वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
एकलपीठ ने समानता के आधार पर राहत दी थी
मामला वर्ष 2013 से 2018 बैच के उन छात्रों से जुड़ा था, जिनका नामांकन तीन बार असफल होने पर निरस्त माना जाता है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने वर्ष 2021-2022 में कुछ छात्रों को विशेष अनुमति दी थी, जिसे अन्य छात्रों ने ‘पिक एंड चूज’ नीति बताते हुए चुनौती दी। एकलपीठ ने समानता के आधार पर राहत दी थी।
गलत लाभ सभी को नहीं दिया जा सकता
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अनुसार दो वर्षीय कोर्स अधिकतम तीन वर्ष में पूरा करना अनिवार्य है। कार्यकारी आदेश वैधानिक नियमों को शिथिल नहीं कर सकते। कोर्ट ने ‘नकारात्मक समानता’ को भी अस्वीकार करते हुए कहा कि गलत लाभ सभी को नहीं दिया जा सकता।