CBSE ने कक्षा 9 के सिलेबस में किया बड़ा बदलाव, इंग्लिश के पुराने 29 में से 28 चैप्टर हटाए
सीबीएसई ने नौवीं कक्षा के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है, जिसमें 'कावेरी' नामक नई पुस्तक के माध्यम से आठ भारतीय और छह विदेशी लेखकों को शामि ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
नौवीं अंग्रेजी में 'कावेरी' पुस्तक, 8 भारतीय, 6 विदेशी लेखक।
पाठ्यक्रम में भारतीय संदर्भों को महत्व, रटने से मुक्ति का लक्ष्य।
हिंदी पाठ्यक्रम में भी बदलाव, कई पुराने पाठ हटाए गए।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सीबीएसई ने कक्षा नौ के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अंग्रेजी विषय में नई पुस्तक कावेरी बच्चों को पढ़ाई जाएगी। इसमें आठ भारतीय और छह विदेशी लेखक पढ़ाए जाएंगे। जिन भारतीय लेखकों को पढ़ाया जाएगा उनमें सुधा मूर्ति, रवींद्र नाथ टैगोर, सुब्रह्मण्यम भारती, नगालैंड के टेम्सुला आओ, दीपा मलिक, फिरदौस कांगा, एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लेखक शामिल हैं।
विदेशी लेखकों की बात करें तो ओ हेनरी, एव लिन ग्लेनी, कैथरिन मैन्स-फील्ड, ऐलबर्ट आइन स्टाइन को पढ़ाया जाएगा। पुराने 29 अध्याय में से 28 बदल दिए गए हैं। सिर्फ एक पाठ द लॉस्ट लीफ रखा गया है। पाठ्यक्रम में भारतीय संदर्भों को महत्व दिया गया है। समाज और पर्यावरण के साथ नैतिकता व नीतिशास्त्र की समझ विकसित कराने का प्रयास है।
हाउ आई टाट माय ग्रैंडमदर टू रीड, अ टेल फ्रॉम एन्शिएंट इंडिया, इंडियन नालेज सिस्टम एक्ससर्ट्स जैसे पाठ छात्र छात्राओं को भारतीय परिवेश से जोड़ने वाले हैं। एनपीएस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य संजय श्रीवास्तव के अनुसार नौवीं के पाठ्यक्र में अब 56 प्रतिशत भारतीय पृष्ठ भूमि के लेखक हैं जबकि दसवीं में अब भी 77 प्रतिशत विदेशी लेखक पढ़ाए जा रहे हैं। उन्हें अंग्रेजी साहित्य के लिए आवश्यक माना गया है।
बोर्ड ने इस बार पाठ्यक्रम में बदलाव तो कर दिया है लेकिन अभी पुस्तकों की उपलब्धता नहीं है जिससे कठिनाई हो रही है। स्कूल स्तर पर शिक्षक विषयवार नोट्स दे रहे हैं। इसीक्रम में पतंजलि ऋषिकुल के प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह का कहना है कि कुछ विषयों के पीडीएफ सीबीएसई ने जारी किए हैं। उनका प्रयोग स्कूलों में हाे रहा है। फर्स्ट टर्म परीक्षाएं होने वाली हैं।
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शिक्षकों ने अपने स्तर से पाठ्यक्रम के अनुसार नोट्स तैयार कर बच्चों को दिए हैं। पाठ्यक्रम का बदलाव बच्चों को रटने की प्रवृत्ति से रोकना और समझने के लिए प्रेरित करना है। देशभर में अंग्रेजी की पढ़ाई में एकरूपता लाने का भी प्रयास है। पहले 29 पाठ पढ़ाए जा रहे थे अब मात्र 16 अध्याय बच्चों को पढ़ने हैं जिससे बोझ घटेगा। दीपा मलिक का इंटरविव, सुधा मूर्ति की कहानी बच्चों को वास्तविक जीवन से जोड़ने वाली है।
महावीर प्रसाद द्विवेदी को बोझिल मानकर पाठ्यक्रम से हटाया गया
सीबीएसई ने हिंदी के पाठ्यक्रम में भी फेर बदल किया है। पद्य की पुस्तक से देव के सवैये, गिरिजा कुमार माथुर की रचना छाया मत छूना, ऋतुराज का कन्यादान पाठ हटा दिया गया है। गद्य से महावीर प्रसाद द्विवेदी का पाठ स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचना मानवीय करुणा की दिव्य चमक अब नहीं पढ़ाई जाएगी।
चेखव की गिरगिट के साथ जॉर्ज पंचम की नाक जैसे पाठ भी हटा दिए गए हैं। प्रेम चंद की कहानी दो बैलों की कथा, राहुल सांकृत्यायन का पाठ ल्हासा की ओर, श्यामाचरण दुबे का उपभोक्तावाद की संस्कृति, जाबिर हुसैन का सांवले सपनों की याद जैसे पाठ अब पढाए जाएंगे।