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मध्य प्रदेश में किसान की जान लेने वाले ‘कालर नंबर वन’ से अब प्रयागराज में दहशत, कौन है ये कोरांव में छिपा जानवर?

By Surya Prakash Tiwari Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 06 Sep 2026 05:59 PM (IST)

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ से 'कालर नंबर वन' हाथी अपनी मादा साथी के साथ प्रयागराज के अतरेंजी जंगल पहुंचा है। ...और पढ़ें

मध्य प्रदेश से प्रयागराज के कोरांव में आया 'कालर नंबर वन' हाथी व निगरानी करते वनकर्मी। जागरण

मध्य प्रदेश से प्रयागराज के कोरांव में आया 'कालर नंबर वन' हाथी व निगरानी करते वनकर्मी। जागरण

HighLights

  1. करीब 200 दिनों में अपनी मादा साथी संग हाथी ने लांघी एक प्रदेश और छह जिलों की सीमा

  2. प्रयागराज मेंकोरांव रेंज के अतरेंजी जंगल में डाला डेरा, कई गांवों में दहशत का माहौल कायम

  3. निगरानी के लिए वन विभाग ने इन हाथियों को जीपीएस वाले कालर आइडी पहना रखा है

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मध्य प्रदेश के उमरिया जनपद के बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में एक किसान को मौत के घाट उतारकर दहशत फैलाने वाला हाथी ‘कालर नंबर वन’ अपनी एक मादा साथी के साथ प्रयागराज आ पहुंचा है। करीब 200 दिनों में एक प्रदेश और छह जिलों की सीमा लांघकर बांधवगढ़ से आए आए हाथी के इस जोड़े ने कोरांव के अतरेंजी जंगल में डेरा जमाया है। चिंता की बात यह है कि वन विभाग के पास इन्हें वापस भेजने का कोई विकल्प ही नहीं। हाथी अपनी मर्जी से ही वापस जाएंगे। तब तक महकमा सिर्फ निगरानी करेगा।

पड़ोसी राज्य के बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में इस वक्त करीब 65 हाथियों का झुंड है, जिनमें यह जोड़ा भी शामिल है। इस जोड़े में नर हाथी की उम्र लगभग 25 वर्ष और मादा की उम्र करीब 30 साल है। छोटे-छोटे टुकड़ों में यह हाथी उमरिया, अनूपपुर, सीधी, कटनी सहित आसपास के दूसरे जिलों के जंगलों में विचरण करते रहते हैं। इस झुंड में चार ऐसे नर हाथी हैं, जिन्होंने अलग-अलग चार लोगों को मौत के घाट उतारा है। निगरानी के लिए वन विभाग ने इन हाथियों को जीपीएस वाले कालर आइडी पहना रखा है।

संगम नगरी आया नर हाथी भी इनमें शामिल हैं। इसका इंडियन एलीफैंट आइडी नंबर 7548 है लेकिन इसे कालर नंबर वन के नाम से जाना जाता है। इस हाथी ने दो साल पहले उमरिया के मानपुर में एक किसान को कुचलकर मार डाला था। तब से बांधवगढ़ में इसकी दहशत फैल गई थी। अभयारण्य के अधिकारियों का कहना है कि कालर नंबर वन और मादा साथी दोनों 14 फरवरी को अपने झुंड से अलग हो गए थे।

इसके बाद यह जोड़ा भटकते-भटकते रीवा, मऊगंज जनपद और मीरजापुर के जंगल होते हुए प्रयागराज पहुंच गया। शुक्रवार की देर शाम दोनों ने कोरांव के अतरेंजी जंगल में शरण ली। इस दौरान एक खेत में लगी मक्के की फसल बर्बाद कर दी। ग्रामीणों को जब इसका पता चला तो दहशत फैल गई। लोग डर के मारे खेतों की तरफ नहीं जा रहे हैं। वन विभाग की टीमें लगातार हाथियों की निगरानी कर रहीं हैं। स्थानीय लोगों को सतर्क भी किया जा रहा है।

15 दिन पहले तक सीधी में मिली थी लोकेशन

बांधवगढ़ अभयारण्य की टीम जीपीएस ट्रैकर के माध्यम से लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। करीब 15 दिन पहले तक इसकी लोकेशन सीधी में मिली थी। इनकी लोकेशन जांचने के लिए ट्रैकिंग मशीन का प्रयोग करते हैं। अभयारण्य के रेंज अधिकारी सुग्रीव प्रसाद ने बताया कि यह ट्रैकिंग मशीन प्रयागराज भेजी गई है। ताकि, वहां हाथियों की निगरानी में दिक्कत न हो।

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ उद्यान से हाथी का एक जोड़ा भटक कर यहां आ गया है। इनकी याददाश्त बहुत तेज होती है। यह खुद उसी रास्ते से वापस जाएंगे। इन्हें वापस भेजने का कोई तरीका नहीं है।
- अरविंद कुमार यादव, डीएफओ, प्रयागराज।