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    प्रयागराज से लेकर कौशांबी तक यमुना की धारा के बीच बेखौफ बालू का खनन, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश दरकिनार

    By shyam mishra Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 09 Apr 2026 08:22 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज और कौशांबी में यमुना नदी में अवैध बालू खनन जारी है, जहां खनन माफिया एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। नदी के बीच में ...और पढ़ें

    कौशांबी के उमरवल यमुना नदी के घाट पर ऐसे किया जा रहा बालू का अवैध खनन। जागरण

    कौशांबी के उमरवल यमुना नदी के घाट पर ऐसे किया जा रहा बालू का अवैध खनन। जागरण

    HighLights

    1. यमुना नदी की धारा के बीच उतारी जा रहीं नाव के साथ पोकलैंड और बैकहोलोडर

    2. नैनी से लेकर कौशांबी तक यमुना नदी किनारे बनाए गए अवैध घाटों से हो रहा परिवहन

    3. यमुना का हर दिन सीना चीर रहे माफिया, खनन विभाग व पुलिस से गठजोड़ की शिकायत

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज/कौशांबी। यमुना अब नदी नहीं, खुलेआम लूटा जा रहा खजाना बन चुकी हैं। प्रयागराज से कौशांबी तक इसकी धारा को दिन-रात चीरते खनन माफिया कानून, प्रशासन और व्यवस्था तीनों को चुनौती दे रहे हैं। यमुना का कलेजा चीरकर हर रोज 50 से 55 लाख घनफीट बालू का खनन किया जा रहा है। कौशांबी में तो हालात और भी चौंकाने वाले हैं, जहां तय सात पट्टा घाटों के मुकाबले 20 स्थानों पर खनन हो रहा है। कई जगह बिना पट्टे के ही बीच धारा में बैकहो लोडर और पोकलैंड उतार दी गई हैं।

    प्रयागराज के 21 स्थानों पर अवैध खनन

    प्रयागराज में सैकड़ों नावों के सहारे नदी के बीचोबीच जिस बेशर्मी से बालू निकाला जा रहा है, वह न सिर्फ पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि शासन की विफलता का सबूत भी है। यहां पट्टा केवल चार स्थानों के लिए है लेकिन खनन 21 से ज्यादा स्थानों पर। यह आंकड़ा ही बताता है कि खेल कितना बड़ा और संगठित है। बिना नंबर के दौड़ते हजारों ट्रक और डंपर इस अवैध साम्राज्य की धड़कन बन चुके हैं।

    जिम्मेदार अफसर बने अनजान

    सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद नदी की धारा में मशीनें उतर रही हैं, और जिम्मेदार अफसर 'अनजान' बने बैठे हैं। इस संगठित लूट की परतें खोलने और पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति सजग करने को दैनिक जागरण आज से एक विशेष समाचारीय शृंखला की शुरुआत कर रहा है।

    खनन माफिया के निशाने पर यमुना नदी

    यमुना नदी इन दिनों खनन माफिया के निशाने पर है। खनन विभाग, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से बेखौफ माफिया नदी की धारा में भारी पैमाने पर बालू निकाल रहे हैं। नैनी से लेकर कौशांबी तक 30 से ज्यादा स्थानों पर यमुना के बीचोबीच बालू खनन का खेल चल रहा है। कौशांबी में नदी की धारा में पोकलैंड और बैकहोलोडर उतार दिए गए हैं। अवैध रूप से घाट और मार्ग बनाए गए हैं। जिन पर बिना नंबर वाले हजारों ट्रक और डंपर बालू ढोने में लगे हैं।

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    सैकड़ों नावें भी लगाई गईं

    नैनी क्षेत्र के महेवा, मड़ौका और बसवार के सामने यमुना के बीच में 300-300 नावें लगाई गई हैं, जिससे श्रमिक भोर से ही बालू निकालना शुरू कर देते हैं और अंधेरा होने तक निकालते हैं। इससे नदी प्रणाली और पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है। यह पूरा खेल इतनी निर्भीकता से चल रहा है कि मानो खनन माफिया को किसी का भय नहीं।

    वरिष्ठ खान अधिकारी बोले

    नवंबर से ही इस तरह बालू का अवैध खनन यमुना में हो रहा लेकिन खनन विभाग की ओर से अब तक एक भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है। यही हाल कौशांबी का है। माफिया रोज लगभग 50 से 55 लाख घन फीट बालू अवैध रूप से यमुना नदी की धारा से निकलवा रहे हैं। नवंबर से अब तक पांच माह में 35 करोड़ घन फीट से ज्यादा बालू का खनन किया जा चुका है। वरिष्ठ खान अधिकारी केके राय का कहना है कि यमुना नदी के बीच में बालू खनन प्रतिबंधित है, जहां भी इस तरह से खनन होगा तो जुर्माना के साथ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

    खास-खास

    - 11 घाटों पर नदी के बाहर खनन विभाग ने बालू निकालने का दिया है पट्टा
    - 30 से ज्यादा स्थानों पर यमुना की धारा में खुलेआम बालू निकालने का चल रहा है कार्य
    - प्रयागराज में चार और कौशांबी में विभाग की ओर से 7 घाटों पर खनन की दी गई है अनुमति
    -प्रतिदिन 55 लाख घन फीट से ज्यादा निकाल रहे अवैध बालू, जलीय जंतुओं पर संकट
    -सफेदपोश नेता, प्रशासन, पुलिस व खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

    कागजों में पट्टा 11 स्थानों का पर खनन बेहिसाब 

    प्रयागराज से लेकर कौशांबी तक यमुना किनारे बालू खनन का खेल अब प्रशासन के नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है। कागजों में महज 11 घाटों पर पट्टा है, लेकिन हकीकत में 40 घाटों पर दिन-रात अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर रोजाना यमुना का सीना चीरकर बीच धारा से करीब 55 लाख घन फीट बालू निकाली जा रही है।

     बैकहो लोडर और पोकलैंड से बालू खबन

    नावों के साथ बैकहो लोडर और पोकलैंड जैसी मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पांच माह से चल रहे इस अवैध कारोबार पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 15-16 सौ नावों के जरिए संगठित तरीके से हो रहा खनन बताता है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि विभाग से लेकर सफेदपोश तक की मिलीभगत है। ग्रामीणों में डर का माहौल है, जबकि माफिया बेखौफ हैं। जिम्मेदार कहते हैं, कार्रवाई होगी।

     नदी के बालू खनन पर माफिया की नजर

    यमुना के बालू की हर ओर मांग है। यही वजह है कि इस नदी के बालू पर खनन माफिया की पैनी नजर है। यमुना में लगभग 15-16 सौ नावों से रोज खनन कराया जा रहा है। प्रश्न यह भी है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे बालू का अवैध खनन को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? अवैध खनन वाले स्थानों पर छापेमारी तो दूर इन्हें अब तक चिन्हित भी नहीं किया जा सका है। कार्रवाई न होना खनन विभाग, पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न है।

     यमुना के इन घाटों पर बालू का अवैध खनन

    यमुना के साथ ही गंगा के मवैया, लवायन, चाड़ी, चटकहना, खड़सरा, मनैया, रवनिका, कबरा, डीहा, सेमरहा, गड़ैला, दुमदुमा, परानीपुर, लाक्षागृह घाटों के पास बालू का अवैध खनन कराया जा रहा है। मोहब्बतगंज, बसवार, अमिलिया, पालपुर, बीकर, देवरिया, मोहिनी का पूरा, कंजासा, कैनुआ, बिरवल, जगदीशपुर, मानपुर, कचरा, पचवर, मझियारी, अमिलिया, सेमरी व प्रतापपुर में भी अवैध खनन चल रहा है। इन स्थानों पर नदी के किनारे बैकहोलोडर व पोकलैंड लगाकर अवैध रूप से घाट बनाए गए हैं, जहां नावों से बालू को उतारा जाता है।

     पट्टा वाले क्षेत्रों में भी बीच नदी बालू का अवैध खनन 

    यहां से ट्रकों व डंपरों से ढोकर अन्यत्र पहुंचाया जाता है। दो-तीन घाटों के लिए एक रास्ता बनाया गया है। जहां पट्टा भी हुआ है तो वहां पर नदी के बाहर ही बालू निकाला जा सकता है मगर पट्टा वाले क्षेत्रों में भी बीच नदी बालू का अवैध खनन कराया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना नदी से इस तरह अधाधुंध बालू निकालना नदी के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर सकता है।

     क्षेत्र में भय का माहौल

    इससे नदी का प्रवाह प्रभावित होगा, कटाव बढ़ेगा और आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर गिरने का खतरा भी बढ़ जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि खनन माफिया के बढ़ते दबदबे के चलते कोई खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा। रात के अंधेरे में शुरू हुआ यह खेल अब दिन के उजाले में भी जारी है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।

    सीमा विवाद में फंसे ब्यूर और उमरवल

    खनन विभाग द्वारा महेवाघाट, दलेलागंज, पभोसा, कटैया, मल्हीपुर, केवट का पुरवा (नंदा का पुरवा), ऐगवां (महिला) और भवनसुरी (आठ) घाटों पर फिलहाल खनन का पट्टा दिया गया है। इसमें से दलेलागंज और केवट का पुरवा में पानी होने के कारण पट्टाधारकों द्वारा भुगतान न किए जाने से अभी खनन नहीं होने के दावे हैं। वहीं, उमरवल, ब्यूर, छेकवा में अवैध खनन हो रहा है।

    रात से भोर से पहले तक अवैध खनन

    उमरवल में तो रात नौ, 10 बजे से सुबह प्रकाश होने के पहले तक अवैध खनन होता है। बालू के परिवहन के लिए पतला रास्ता भी बनाया गया है। जबकि ब्यूर समेत अन्य घाटों पर दिन में भी बैकहो लोडर और पोकलैंड द्वारा यमुना की धारा में बालू का खनन जारी रहने की बात है। उमरवल में पिछले दिनों विभागीय अधिकारियों ने छापेमारी कर मौके पर डंप बालू को यमुना में फेंकवा दिया था। हालांकि, वहां फिर से अवैध खनन होने लगा है।

     क्या बोले कौशांबी के खनन अधिकारी

    कौशांबी में खनन अधिकारी सीपी जायसवाल कहते हैं पट्टा खनन स्थलों का लगातार जांच की जा रही है। जहां गड़बड़ी मिलती है, वहां पर जुर्माना लगाने समेत अन्य विधिक कार्रवाई भी की जाती है। ब्यूर और उमरवल में अवैध खनन स्थल प्रयागराज में है। जिले में फिलहाल अवैध खनन होने की कहीं से शिकायत नहीं मिली है। प्रयागराज के खान अधिकारी कहते हैं यह हमारे क्षेत्र में नहीं है।

    कहां है खनन इंस्पेक्टर से लेकर अफसर तक

    यमुना नदी में रोज लाखों घन फीट बालू अवैध रूप से निकाली जा रही है मगर खनन विभाग के निरीक्षक से लेकर अफसर तक कहां हैं, इसको लेकर गांव के लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। यही नहीं बारा तहसील प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी अवैध खनन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सके हैं।

    यमुना में बालू खनन के लिए एनजीटी नियम 

    1. नदी की सक्रिय जलधारा से बालू निकालना, जलधारा को मोड़ना, या जलधारा के बीच अस्थायी रास्ते बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
    2. केवल पारंपरिक तरीकों की अनुमति है। मशीनों जैसे पोकलेन, जेसीबी का उपयोग अवैध है।
    3. खनन केवल जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट और खनन योजना के तहत नदी के किनारों के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाना चाहिए।
    4. खनन से पहले स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी से मंजूरी अनिवार्य है।
    5. खनन केवल दिन के समय किया जा सकता है। रात में खनन की अनुमति नहीं है।
    6. पट्टाधारकों को रेत के भंडारण और परिवहन के लिए सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस का उपयोग करना अनिवार्य है ताकि अवैध खनन पर नज़र रखी जा सके।