रेलवे में अब नहीं चलेगी मनमर्जी, हर जोन में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों का होगा 'ग्रीन ऑडिट'
रेलवे बोर्ड अब पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों का 'ग्रीन ऑडिट' कराएगा और 'वार्षिक पर्यावरण स्थिरता रिपोर्ट' प्रकाशित करेगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
रेलवे बोर्ड कराएगा सभी जोन का 'ग्रीन ऑडिट'।
जोन को 22 जून तक देनी होगी पर्यावरण रिपोर्ट।
कार्बन उत्सर्जन घटाने और हरित ऊर्जा पर जोर।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पर्यावरण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने वाले रेलवे के अलग-अलग जोन अब अपनी मनमर्जी नहीं चला पाएंगे, क्योंकि रेलवे बोर्ड अब पाई-पाई का 'ग्रीन ऑडिट' कराकर अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने जा रहा है।
बोर्ड अब 'वार्षिक पर्यावरण स्थिरता रिपोर्ट' तैयार कर प्रकाशित करेगा। रेलवे बोर्ड के निदेशक अजय झा ने देश के सभी रेलवे जोन, उत्पादन इकाइयों और सार्वजनिक उपक्रमों से पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। 22 जून तक रिपोर्ट और तस्वीरें बोर्ड को भेजनी होंगी।
हरित योजनाओं से ट्रेनों का कार्बन उत्सर्जन कम होगा
पर्यावरण सुधार के नाम पर जो बजट खर्च हो रहा है, जमीनी स्तर पर उसका क्या नतीजा है और जोन किस लक्ष्य तक पहुंचे हैं, यह स्पष्ट होगा। पारदर्शिता बढ़ेगी साथ ही यह सार्वजनिक होगा कि उनका सफर कितना पर्यावरण अनुकूल हो रहा है। इससे ट्रेनों और स्टेशनों पर सौर ऊर्जा का उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे कामों को और रफ्तार मिलेगी। पाइपलाइन में चल रही नई हरित योजनाओं से ट्रेनों का कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
उदाहरण के तौर पर, उत्तर मध्य रेलवे भारतीय रेल के 'मिशन 2030' (नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन) के तहत यहां शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। जोन ने 18.60 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाए गए, जिससे नौ मिलियन यूनिट से अधिक बिजली (हरित ऊर्जा) का उत्पादन हुआ, आठ हजार मीट्रिक टन से अधिक कार्बन कम हुआ और 5.69 करोड़ रुपये की बचत हुई।
अब इस क्षमता को बढ़ाकर 30 मेगावाट करने और 27 हजार मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन रोकने का नया लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा महाप्रबंधक कार्यालय परिसर की गंगा, पावर हाउस और सरस्वती बिल्डिंग को 'शून्य प्लस लेबल' का प्रमाणन दिया गया है। साथ ही, 45 एलएचबी रेकों को हेड आन जेनरेशन (एचओजी) तकनीक में बदलने से 52.17 करोड़ रुपये मूल्य के डीजल की बड़ी बचत हुई है।
अब बोर्ड ऐसे ही ठोस नतीजों का हिसाब हर जोन से मांग रहा है। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया रिपोर्ट निर्धारित समय तक बोर्ड भेज दी जाएगी।
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