दिल्ली-मुंबई और हावड़ा रूट पर खत्म होगा वेटिंग का झंझट, पटरी पर उतरेंगे 21000 से ज्यादा नए आधुनिक ट्रेन कोच
भारतीय रेलवे अगले तीन वित्तीय वर्षों में 21,742 नए आधुनिक डिब्बे पटरियों पर उतारेगा। इससे दिल्ली-मुंबई और हावड़ा जैसे व्यस्त ...और पढ़ें

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HighLights
21,742 नए आधुनिक रेल डिब्बे होंगे शामिल।
वेटिंग लिस्ट खत्म होगी, यात्रा आरामदायक बनेगी।
वंदे भारत स्लीपर कोच भी तैयार किए जाएंगे।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। दिल्ली, मुंबई और हावड़ा जैसे देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों को जल्द लंबी वेटिंग लिस्ट और जनरल डिब्बों की धक्का-मुक्की से राहत मिलेगी। देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर पर अगले तीन वित्तीय वर्षों में 21,742 नए आधुनिक डिब्बे पटरियों पर उतारेंगे।
नए कोच प्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 के बीच इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (चेन्नई), रेल कोच फैक्ट्री (कपूरथला) और माडर्न कोच फैक्ट्री (रायबरेली) में इन डिब्बों का निर्माण पूरा किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में 9,094 कोच, 2027-28 में 6,564 कोच और 2028-29 में 6,084 कोच बनाए जाएंगे।
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र दिल्ली-हावड़ा और मुंबई-हावड़ा रूट पर स्थित उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) और प्रयागराज मंडल होगा, जहां से रोजाना लाखों की संख्या में यात्री गुजरते हैं। इनमें आम आदमी के बजट वाली ‘अमृत भारत 3.0’ के तहत एसी और नान-एसी के हजारों स्लीपर व जनरल कोच शामिल हैं, जिससे बिहार, पूर्वांचल और बंगाल से दिल्ली-मुंबई जाने वाली नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त बोगियां जोड़कर वेटिंग लिस्ट को नियंत्रित किया जा सकेगा।
रेलवे ने 21 हजार से ज्यादा कोच निर्माण के दिए निर्देश
लंबी दूरी के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रूप में देखने को मिलेगा। रात के सफर को तेज और आरामदायक बनाने के लिए सिर्फ चेन्नई कारखाने में ही तीन वर्षों के भीतर 1,296 वंदे भारत स्लीपर डिब्बे तैयार होंगे। देश के सबसे व्यस्त दिल्ली-प्रयागराज-हावड़ा ट्रंक रूट पर होने के चलते प्रयागराज होकर दिल्ली, पटना और कोलकाता के बीच चलने वाली पहली खेप की स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों की सौगात इस क्षेत्र को मिलेगी।
वहीं, प्रयागराज के पड़ोसी जिले रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) में एलएचबी, मेमू और अमृत भारत कोचों का भारी उत्पादन होने के कारण एनसीआर को नए रैक और अतिरिक्त डिब्बे सबसे पहले उपलब्ध होंगे। इसके अलावा प्रयागराज से कानपुर, मीरजापुर, वाराणसी, अयोध्या और डीडीयू रूट पर चलने वाली पुरानी पैसेंजर ट्रेनों की जगह आधुनिक थ्री-फेज मेमू रेक मिलने से दैनिक यात्रियों का समय भी बचेगा।
रेलवे बोर्ड के निदेशक मैकेनिकल इंजीनियरिंग जयंत रामचंद्रन ने बताया कि 21,700 कोच निर्माण के लिए सभी कारखानों को निर्देश दे दिया गया है।
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