श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी
इलाहाबाद हाई कोर्ट मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद की अगली सुनवाई 18 सितंबर को करेगा। वादी पक्ष के अधिवक्ता ...और पढ़ें

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
HighLights
प्रतिवादी के प्रार्थना पर आपत्ति दाखिल करने के लिए वादी को मिला समय
एकलपीठ ने 25 अगस्त को भोजनावकाश के बाद प्रकरण की सुनवाई की
हाई कोर्ट में इस मामले में सात अलग-अलग प्रार्थनापत्र निस्तारण को लंबित हैं
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट अगली सुनवाई 18 सितंबर को करेगा। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने आज 25 अगस्त को भोजनावकाश के बाद प्रकरण की सुनवाई के दौरान 17 जुलाई को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में विभिन्न वादकारियों द्वारा दाखिल आपत्तियों और संबंधित वादों की स्थिति का अवलोकन किया।
वर्तमान में कुल 18 मूल वाद विचाराधीन
इस मामले में वर्तमान में कुल 18 मूल वाद विचाराधीन हैं, जिनमें 15 वादों की सुनवाई संयुक्त रूप से की जा रही है, जबकि तीन वाद अलग रखे गए हैं। हाई कोर्ट में सात अलग-अलग प्रार्थनापत्र निस्तारण के लिए लंबित हैं। इनमें मूल दस्तावेजों को रिकार्ड पर लिए जाने, राजभाषा अधिनियम, 1963 के अनुपालन, वाद संख्या 17/2023 के निस्तारण तक अन्य 15 वादों की सुनवाई स्थगित रखने तथा लिखित बयान में संशोधन की अनुमति से संबंधित आवेदन शामिल हैं।
अगली तारीख पर लंबित प्रार्थनापत्रों पर होगी सुनवाई
अगली तारीख पर दोपहर दो बजे से लंबित प्रार्थनापत्रों पर सुनवाई की जाएगी। भगवान श्री बाल कृष्ण केशव देव विराजमान खेवट नंबर 255 और 6 अन्य बनाम यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और 3 अन्य शीर्षक वाले केस की सुनवाई के दौरान मंगलवार को वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी, सौम्या श्रीवास्तव, प्रभाष पांडेय और प्रदीप कुमार शर्मा उपस्थित रहे।
वादी के अधिवक्ता ने समय मांगा, कोर्ट ने स्वीकार किया
प्रतिवादी पक्ष की ओर से तसनीम अहमदी और महमूद प्राचा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से, जबकि तनवीर अहमद खान, अफजाल अहमद, अजीम अहमद काजमी और हरेराम त्रिपाठी कोर्ट में उपस्थित थे। वादी के अधिवक्ता ने प्रतिवादी संख्या-2 की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल करने के लिए और समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
