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प्रयागराज में 28 शत्रु संपत्तियों की ऑनलाइन होगी नीलामी, करछना में 6 की लग चुकी बोली, ये सभी सरकार के कब्जे में

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 16 Aug 2026 05:56 PM (IST)

प्रयागराज में 28 शत्रु संपत्तियों की जल्द ही ऑनलाइन नीलामी होगी, जबकि करछना में 6 संपत्तियों की बोली लग चुकी ...और पढ़ें

सरकार के कब्जे में आ चुकी प्रयागराज में शत्रु संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी शुरू हो गई है।

सरकार के कब्जे में आ चुकी प्रयागराज में शत्रु संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी शुरू हो गई है।

HighLights

  1. जनपद में सरकार के कब्जे में 34 शत्रु संपत्तियां, सभी 187 संपत्तियां भारत सरकार के नाम दर्ज

  2. करछना में 6 शत्रु संपत्तियों की बोली लग चुकी है।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जनपद में सरकार के नाम और उसके कब्जे में आ चुकीं शत्रु संपत्तियों की नीलामी भी होने लगी है। यमुनापार में करछना तहसील की छह संपत्तियां नीलाम हो चुकी हैं। इनकी नीलामी भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा आनलाइन कराई गई है, जो दूसरे राज्यों के लोगों को मिली हैं। अभी 28 अन्य संपत्तियों की भी बोली जल्द ही ऑनलाइन माध्यम से लगेगी। 

जनपद में कुल 187 शत्रु संपत्तियां हैं जिनमें 153 पर कब्जा है। इन संपत्तियों की कुल लगभग 2550 करोड़ रुपये कीमत आंकी गई है। जो 28 संपत्तियां नीलाम की जाने वाली हैं, उनकी कीमत लगभग 210 करोड़ रुपये के होने का अनुमान है। नीलामी में उसे ही ये संपत्तियां मिलेंगी, जिसके द्वारा ज्यादा बोली लगाई जाएगी। ये संपत्तियां सदर तहसील क्षेत्र में ज्यादा हैं।

अतरसुइया, दरियाबाद, जानसेनगंज, रोशनबाग, नखास कोहना, करेंहदा, लूकरगंज, कटहुला गौसपुर, नीमसरांय, म्योराबाद में ये संपत्तियां हैं। करछना तहसील क्षेत्र के बलापुर व नीबी तालुका खुर्द में संपत्तियां बची हैं। बलापुर में छह संपत्तियां हैं जिनका कुल रकबा दो एकड़ में है। ये जहीरुद्दीन के नाम थीं, जो बंटवारे में पाकिस्तान चले गए थे।

वहीं नीबी तालुका खुर्द में तीन एकड़ की तीन संपत्तियां हैं। ये संपत्तियां गज्जू खां पुत्र इद्दन खां की थी, जो 1947 में पाकिस्तान चले गए थे। सदर तहसील के अहमदगंज में दो मकान हैं, जो एक एकड़ में हैं। नीम सरांय में कलामुद्दीन पुत्र सलामत अली के नाम पांच एकड़ जमीन थी, जिस पर अब 17 मकान बन गए हैं। म्योराबाद में शफीन्नुशां बीवी पत्नी खलील अहमद के एक एकड़ में दो मकान थे। कलामुद्दीन और शफीन्नुशां भी पाकिस्तान चली गई थीं।

फूलपुर के कुसेहटा में अमीनुद्दीन की आठ एकड़ जमीन शत्रु संपत्ति घोषित हुई है। सांवडिह में आसिफ हुसैन पुत्र तहव्वुर हुसैन की 10 एकड़ की शत्रु संपत्ति भी घोषित है। सोरांव के निंदूरा में 30 एकड़ की कुल 54 संपत्तियां हैं। ये संपत्तियां शकील अब्दुल वाहिद व मोहम्मद डा.रजा के नाम थीं, जो लखनऊ के नवाब के संबंधी भी थे, जो इस्लामाबाद में बसे थे। यहां कुछ संपत्तियों की कस्टोडियन अख्तारी जहा बेगम हैं। मंसूराबाद, लालगोपालगंज, मऊआइमा में भी शत्रु संपत्तियां हैं जिनकी जांच चल रही है। 

एयरपोर्ट निर्माण में शत्रु संपत्तियों की बिक्री की जांच

सिविल एयरपोर्ट बमरौली के निर्माण की परियोजना जैसे ही मंजूर हुई थी, भूमाफिया सक्रिय हो गए थे। वर्ष 2017-18 में जब एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन खरीदी जा रही थी, तब भूमाफिया ने सदर तहसील, भूअध्याप्ति अधिकारी कार्यालय व उप निबंधक कार्यालय के स्टाफ से मिलीभगत कर शत्रु संपत्तियों की भी बिक्री कर दी थी, जिसका पैसा बंदरबाट कर लिया गया था।

सिविल एयरपोर्ट के लिए 9500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से कुल 50 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव बना था, जिसका लगभग 1886 करोड़ रुपये भुगतान हुआ था। इसमें 48.34 एकड़ का बैनामा हुआ था, जबकि 1.66 एकड़ जमीन विवादित होने के चलते उसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। खरीदी गई जमीन में काफी शत्रु संपत्ति होने का पता चला तो तत्कालीन मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने जांच बैठा दी। कमेटी इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों से जवाब भी तलब कर रही है। इसके लिए उस समय के अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार स्टाफ की जानकारी इकट्ठा कर उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है।  

अरबों की शत्रु संपत्ति पर माफिया का कब्जा

जिले में अरबों रुपये कीमत की लगभग 530 बीघे शत्रु संपत्ति पर भूमाफिया का कब्जा है। इन संपत्तियों को जल्द ही अभियान चलाकर कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके लिए मजिस्ट्रेटों की टीमें गठित कर दी गई हैैं। शासन के निर्देश पर शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामलों की जांच कराई गई थी। अधिकारियों की जांच में रिपोर्ट में पता चला है कि कई स्थानों पर तो भूमाफिया ने अवैध तरीके से इन संपत्तियों की प्लाटिंग तक कर दी और वहां बाकायदा कालोनी बस गई है।

इसी तरह अन्य स्थानों पर अवैध निर्माण करा दिए गए। शत्रु संपत्तियों पर सबसे ज्यादा कब्जा करेली, करैलाबाग, पूरामुफ्ती, धूमनगंज, झलवा, शाहगंज, अतरसुइया, खुल्दाबाद, फूलपुर, मऊआइमा, लालगोपालगंज व भारतगंज में हुआ है। कब्जे वाली शत्रु संपत्ति चिन्हित कर ली गई है। जल्द ही इन पर बुलडोजर गरजेगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

सरकार के पास है संरक्षण का अधिकार 

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान जो लोग पाकिस्तान चले गए थे, उनकी संपत्ति यहां रह गई थी। घर के साथ खेती की काफी जमीनें थीं। इस संपत्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1965 में शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया था, जिसके तहत इन संपत्तियों के संरक्षण का अधिकार सरकार के पास है। 

65 करोड़ की 21 शत्रु संपत्तियों पर पीडीए का कब्जा

गृह मंत्रालय की टीम ने सदर तहसील क्षेत्र में शत्रु संपत्तियों का सर्वे किया है। कुल 31 शत्रु संपत्तियों के सर्वे में 21 पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) का कब्जा है। मंत्रालय की ओर से अब पीडीए को नोटिस भेजा जाएगा। सदर तहसील के मौजा सराय नीबी इलाके में घोषित कुल 28 शत्रु संपत्तियां हैं। इन सभी का सर्वे हुआ तो पता चला कि पीडीए का इन संपत्तियों पर कब्जा है। पीडीए ने इन संपत्तियों में 14 संपत्तियों पर रिहायशी कालोनी बनवा दिया है, जबकि सात शत्रु संपत्तियों पर पार्क विकसित करा दिया है। इन शत्रु संपत्तियों की 65 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत आंकी गई है। ये सभी शत्रु संपत्तियां एक ही व्यक्ति की हैं, जो बटवारे के दौरान देश छोड़कर पाकिस्तान के कराची शहर चला गया था। 

सात संपत्तियों पर मस्जिदें बनीं 

सदर तहसील क्षेत्र में सात शत्रु संपत्तियों पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण करा दिया गया है। इस संपत्तियों की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है। चौक में घंटाघर के पास स्थित लगभग दो करोड़ रुपये कीमत की एक शत्रु संपत्ति पर साड़ी का शोरूम व रेस्टोरेंट संचालित है। यह संपत्ति 4000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में है। जानसेनगंज में तीन करोड़ रुपये की एक शत्रु संपत्ति पर होटल संचालित है। इस भवन का मानचित्र रिहायशी में स्वीकृत है। मौजा डांडीपुर में एक शत्रु संपत्ति पर अवैध रूप से मकान बना है, जिसका मानचित्र स्वीकृत नहीं है।

शत्रु संपत्तियों की रिपोर्ट सर्वे की तैयार करा कर गृह मंत्रालय को भेजी जा रही है। सर्वे के दौरान सदर तहसील की सभी शत्रु संपत्तियों को चिन्हित कर लिया गया है। जिन पर कब्जा है, उनकी अलग से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।
- अमरेंद्र सिंह, सर्वेक्षक शत्रु संपत्ति, गृह मंत्रालय, भारत सरकार।

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