प्रयागराज के काल्विन अस्पताल के संविदा कर्मियों की हड़ताल, चिकित्सा सेवा प्रभावित; परेशान रहे मरीज व तीमारदार
संविदा पर नियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन' में हड़ताल कर दी है। इस हड़ताल से अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुईं।

प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में हड़ताल के दौरान आक्रोश जताते संविदा स्वास्थ्य कर्मी।
HighLights
नियमितीकरण, कैशलेस इलाज की सुविधा न होने पर जताया आक्रोश
डॉक्टर, नर्स, ओटी टेक्नीशिनयन, वार्ड ब्वाय ने की सांकेतिक हड़ताल
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन' में एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) से संविदा पर नियुक्त स्वास्थ्य कर्मी सोमवार को हड़ताल पर रहे। डॉक्टर, नर्स, काउंसलर, अस्पताल प्रबंधक, ओटी टेक्नीशियन और दवा वितरण व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों ने एकजुट होकर नारेबाजी की। काल्विन में 72 कर्मचारियों ने ड्यूटी नहीं की तो स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा उठीं। तमाम मरीज बिना इलाज के लौटे। आपरेशन थिएटर में नियमित कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला।
कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं
प्रमुख चिकित्साधीक्षक को ज्ञापन देने के बाद कर्मचारियों ने कहा कि हड़ताल प्रांतीय संगठन की ओर से निर्देश मिलने तक जारी रहेगी। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि उन्हें उपेक्षित रखा गया है। बीमार होने पर कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं है। नियमितीकरण पर सरकार विचार नहीं कर रही है, एक समान वेतन व्यवस्था लागू नहीं की जा रही है। अनुकम्पा नियुक्ति की कोई नियमावली भी लागू नहीं की जा रही है। इससे कई तरह की परेशानी सामने आती है। इसी के चलते उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दंत चिकित्साधिकारी संघ के आह्वान पर समस्त संविदा कर्मियों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार अस्पताल में काम ठप कर दिया।
मांगें नहीं मानी गई तो लड़ाई लंबी खिंचेगी
जगदीश मौर्य, ज्ञानेंद्र पांडेय, मनोज कुमार, प्रिया सिंह, पिंकी यादव, अश्विनी कुमार सिंह समेत अन्य कर्मचारियों ने बताया कि लखनऊ में भी प्रांतीय नेतृत्व के द्वारा विरोध चल रहा है। सरकार से मांगें नहीं मानीं तो लड़ाई लंबी खिंचेगी। अस्पताल के प्रबंधक ज्ञानेंद्र पांडेय ने बताया कि प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. आरएस दुबे को ज्ञापन देकर मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाई गई है।
ओपीडी में झांकते रहे मरीज, नहीं मिले डॉक्टर
अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों को न तो डॉक्टर मिले न ही उनके सहायक। खाली कुर्सियां देख तमाम लोग लौट गए। कुछ देर के लिए दवा वितरण केंद्र में भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इससे दवा के बिना कई मरीजों को लौटना पड़ा।
