Janmashtmi : हर मत के श्रद्धालु एक ही दिन मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 1000 एकादशी का फल देगा व्रत
Sri Krishna Janmashtmi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी, जब सभी मतों के श्रद्धालु एक साथ कान्हा का जन्मोत्सव ...और पढ़ें

Sri Krishna Janmashtmi त्रिग्रहीय योग में जन्मेंगे कन्हाई, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
HighLights
त्रिग्रहीय योग में जन्मेंगे कन्हाई, घर-घर बजेगी बधाई
चार सितंबर को मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व
हर मत के श्रद्धालु एक ही दिन मनाएंगे कान्हा का जन्मोत्सव
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Sri Krishna Janmashtmi भाद्रपद की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, त्रिग्रहीय योग के संयोग में लीलाधर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वर्षों बाद वैष्णव, स्मार्त और रोहिणी नक्षत्र को मानने वाले श्रद्धालु एक साथ अर्थात चार सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। भक्तों का उल्लास, उत्साह व उमंग चरम पर होगा। कन्हाई के जन्म लेने पर मठ-मंदिरों के साथ घरों में बधाई बजेगी। मुरली मनोहर का भव्य श्रृंगार कर भक्त भजन-पूजन के जरिए उनकी महिमा का बखान करेंगे।
अष्टमी तिथि कब से कब तक?
ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात 1.33 बजे लग जाएगी। इससे पहले 12.45 बजे से रोहिणी नक्षत्र लग जाएगा। रोहिणी नक्षत्र चार सितंबर की रात 11.12 बजे तक और अष्टमी तिथि 11.13 बजे तक रहेगी।
...इसलिए चार सितंबर को बनाई जाएगी जन्माष्टमी
उन्होंने बताया कि इस तरह चार सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि दोनों का संयोग रहेगा। साथ ही इसी दिन उदया तिथि में रोहिणी नक्षत्र भी प्राप्त होगा। इसलिए स्मार्त, वैष्णव और औदायिक भक्त चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। उक्त तारीख को सिंह राशि में सूर्य, बुध व केतु का संचरण होने से त्रिग्रहीय योग का पुण्यकारी संयोग भी बन रहा है।
एक हजार एकादशी का फल देगा व्रत
Sri Krishna Janmashtmi पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एक हजार एकादशी का फल देने वाला व्रत है। पूरी रात जप व ध्यान का विशेष महत्व है। भविष्य पुराण में वर्णित है कि जन्माष्टमी का व्रत अकाल मृत्यु से बचाता है। इस दिन उपवास रहकर आत्मीय अमृत पान करते हुए अहंकार का त्याग करना चाहिए।
विष्णु नाम का करें जप : डॉ. अमिताभ
ज्योतिषाचार्य डॉ. अमिताभ गौड़ के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सुबह स्नान करके समस्त देवी-देवताओं को प्रणाम करना चाहिए। फिर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लें। दिनभर मन में श्रीकृष्ण, विष्णु नाम जप अथवा श्रीमद्भागवत का यथासंभव पाठ करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद पूजा घर में भगवान श्रीकृष्ण की सोने, चांदी, तांबा, पीतल अथवा मिट्टी की (यथाशक्ति) मूर्ति अथवा चित्र को नए वस्त्र धारण कराकर उन्हें पालने में स्थापित करके पूजन करें।
मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना चाहिए
Sri Krishna Janmashtmi डॉ. गौड़ ने बताया कि पूजन में माता देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद बाबा, यशोदा मइया और लक्ष्मी माता आदि का नाम जरूर बोलकर प्रमाण करें। इसके बाद मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना चाहिए। पंचामृत में तुलसी डालकर व माखन मिश्री का भोग लगाकर खीरा, फल व मिष्ठान अर्पित करके आरती करके सोहर गाकर खुशी मनानी चाहिए।
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