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    स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की मॉड्यूलर रसोई में फैली गंदगी व चूहों का अड्डा, स्वच्छता की अनदेखी हो रही

    By Amerdeep Bhatt Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 30 May 2026 06:18 PM (IST)

    स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की मॉड्यूलर रसोई में गंदगी, चूहे और खराब उपकरण (रोटी मेकर, चिमनी) पाए गए हैं। रोजाना 1000 मरीजों और तीमारदारों के लिए भोजन बन ...और पढ़ें

    प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल की मॉड्यूलर रसोई के बाहर खिड़की के पास गंदगी। जागरण

    प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल की मॉड्यूलर रसोई के बाहर खिड़की के पास गंदगी। जागरण

    HighLights

    1. दो कुंटल आटा की रोटियां बनती हैं हाथ से

    2. कर्मचारी भीषण गर्मी में हाथ से बनाते हैं दो क्विंटल रोटियां।

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में रोज 1000 मरीज और तीमारदारों के लिए जिस 'मॉड्यूलर' रसोई में खाना बनता है। यहां चूहे दौड़ते हैं और खिड़कियों के आसपास बजबजाती गंदगी है। रसोई में चूल्हों के पास भी गंदगी फैली रहती है। यह रसोई दो डॉक्टरों की निगरानी में संचालित हो रही है। इसके कर्मचारियों को गर्मी में पसीने बहाते काम करना पड़ रहा है। रसोई की हाईटेक चिमनी खराब है। रोटी मेटर खराब है। करीब दो कुंटल आटे की रोटियां हाथ से बनाने की विवशता है।

    पूरा किया जा रहा कागजी कोरम 

    मॉड्यूलर रसोई के नाम पर मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में कागजी कोरम ही पूरा हो रहा है। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय की रसोई में चूल्हे, फ्लोर मिक्सर, रोटी मेकर, चिमनी आदि लगवाने में अधिकारियों ने जितनी तत्परता दिखाई, अब उसी रसोई में गंदगी की अनदेखी हो रही है। शुक्रवार को रसोई की खिड़कियों के पास कूड़े के ढेर लगे रहे। गंदा पानी गैस सिलिंडर वाली जाली के पास बहता रहा। उसमें मच्छर भी रहे। रसोई में दो बड़े कमरों में चूल्हे के आसपास कुकर और अन्य बर्तनों से उबाल के बाद खाना फैला रहा। इसके अलावा जहां रसोइयों के सहायक कर्मचारी सब्जियां काटते हैं और आटा, चावल के बोरे रखे रहते हैं वहां चूहों की धमाचौकड़ी रहने से ये सभी खाद्य सामग्रियां संक्रमित होती हैं।  

    रसोई को ठंडा रखने वाली चिमनी खराब

    रसोई में बड़े-बड़े चूल्हे जलते हैं और कुकर से भाप निकलती है। इससे रसोई का तापमान काफी बढ़ जाता है। वहां एक मिनट भी रुक पाना मुश्किल होगा। ऐसे में कर्मचारियों को घंटों रहकर भोजन बनाना पड़ता है। रसोई में वातावरण काे सामान्य रखने के लिए चिमनियां लगाई गई हैं कर्मचारियों को फिर भी बेतहाशा गर्मी में रहना पड़ रहा है।  

    हाथ से बेलते हैं दो कुंटल आटे की रोटी

    मॉड्यूलर रसोई में रोज दो कुंटल आटे की रोटियां बनती हैं। महाकुंभ के बजट से रोटी मेकर खरीदा गया था वह 10 महीने से खराब पड़ा है। अस्पताल प्रशासन इस छोटी से मशीन की मरम्मत ही नहीं करा सका। जबकि मरीजों, तीमारदारों तक खाना पहुंचाने के लिए समय निर्धारित है। गर्मी में रहते रोटी बनाने वाले कर्मचारी कहते हैं कि रोटी मेकर बन जाए तो काफी आसानी होगी।

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    रसोई में साफ सफाई तो रहनी ही चाहिए, भोजन में स्वच्छता और गुणवत्ता को बनाए रखना जरूरी है। गंदगी है, चूहे हैं तो यह गंभीर मामला है। शनिवार को ही इसे दिखवाएंगे। भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।

    - प्रो. डॉ. एके वर्मा, प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।

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