सावन पूर्णिमा पर रायबरेली के डलमऊ में उमड़ी आस्था, ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
Sawan Purnima: सावन पूर्णिमा पर गंगा स्नान के बाद गाय, चींटी, पक्षियों और गरीबों को भोजन कराने का विशेष महत्व है।

डलमऊ के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब
HighLights
सावन पूर्णिमा पर गंगा स्नान के बाद मंदिरों में किया पूजन-अर्चन
बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने गहरे पानी में न जाने की दी हिदायत
संवाद सूत्र, रायबरेली । सावन माह की पूर्णिमा पर शुक्रवार को जिले में डलमऊ के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ घाटों पर जुटने लगी। ‘हर-हर गंगे’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
गंगा स्नान के बाद मंदिरों में की पूजा
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने तट पर स्थित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि, उन्नति और खुशहाली की कामना की। घाटों पर पूरे दिन धार्मिक माहौल बना रहा।
सावन पूर्णिमा पर दान-पुण्य का विशेष महत्व
डलमऊ बड़ा मठ के महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि महाराज ने सावन पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन गंगा स्नान के बाद गाय, चींटी, पक्षियों और गरीबों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। गाय के दूध से बनी खीर का प्रसाद भगवान शिव को अर्पित करने से प्रतिकूल ग्रह शांत होते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
बाढ़ के बीच प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
गंगा का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती। श्रद्धालुओं से गहरे पानी में स्नान न करने की अपील की गई। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थान पर ही गंगा स्नान करने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है।
