धमाके के साथ धंसा रामपुर का 115 साल पुराना बांध, भाखड़ा नदी पर बने अस्थायी तटबंध के टूटते ही मची अफरा-तफरी
रामपुर के बिलासपुर में 115 साल पुराने भाखड़ा नदी बांध को बचाने के लिए बना अस्थाई तटबंध टूट गया, जिससे ...और पढ़ें

भाखड़ा डैम पर पड़ी दरार और डैम पर कटा तटबंध। जागरण
HighLights
पानी की तेज धार को रोकने के लिए रविवार को तैयार हुआ था अस्थायी तटबंध
मुख्य डैम के अस्तित्व पर संकट, बिलासपुर के 40-45 हजार लोग चिंतित
संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। भाखड़ा नदी पर बने 115 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बांध को बचाने के लिए एक सप्ताह से चल रही कवायद को सोमवार सुबह बड़ा झटका लगा। तेज धार रोककर उसका रुख दूसरी ओर मोड़ने के लिए रविवार को बनकर तैयार हुआ अस्थायी तटबंध (काफर डैम) पानी के दबाव में अगले दिन ही टूट गया।
इससे नदी का बहाव फिर बांध के कमजोर हिस्से की ओर मुड़ गया और रिसाव तेज हो गया। करीब 10 बजे तेज धमाके के साथ बांध का दायां हिस्सा और आटोमेटिक गेट के आगे का फर्श धंसने से काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।
मुख्य कंक्रीट ढांचे में चार से पांच इंच चौड़ी दरार आ गई्र। बांध की स्थिति को लेकर बिलासपुर नगर क्षेत्र के करीब 40-45 हजार लोगों में भी चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार सिंह का कहना है कि अस्थायी बांध ठीक कराया जा रहा। स्थिति पर लगातार नजर है, खतरे जैसी कोई बात नहीं है।
27 अगस्त को नगर के भाखड़ा बांध में दो स्थानों पर रिसाव शुरू हुआ था। एक जगह रिसाव से बांध का फर्श टूट गया और वहां से पानी की तेज धार निकलने लगी। दूसरे स्थान पर वर्षों पुराने बांध के नीचे से पानी का रिसाव हुआ, जिससे बांध का हिस्सा धंस गया।
24 घंटे के भीतर यहां 20 से 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया था। सिंचाई विभाग ने पहले धंसे हुए हिस्से की मरम्मत कराई। गड्ढे को मिट्टी और पत्थरों से पाटने के बाद बांध के सामने से हो रहा रिसाव रोकने की कवायद शुरू की गई।
इसके लिए प्रयागराज से मड पंप मंगाकर जियो ट्यूब की मदद से नदी की धार दूसरी ओर मोड़ने का प्रयास हुआ। हालांकि, इसमें सफलता न मिलने पर रविवार को अस्थायी तटबंध बनाया गया। हालांकि, सोमवार सुबह पानी का दबाव बढ़ने के साथ ही तटबंध टूट गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर काम कर रहे मजदूरों अनुसार, तटबंध टूटने के बाद पानी फिर रिसाव वाले स्थान से तेज गति से बहने लगा। इसी दौरान बांध का दायां हिस्सा व फर्श गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि खलबली मच गई।
कर्मचारियों के मुताबिक, दाएं हिस्से में स्लूज गेट के पीछे भूमिगत पानी का रिसाव हो रहा था। विभाग ने जियो ट्यूब और मिट्टी की बोरियों की मदद से नदी का रुख उत्तर की ओर मोड़ने की योजना बनाई थी।
अस्थायी तटबंध से पानी रोकने के बाद मुख्य ढांचे के नीचे दबाव बढ़ा, जिससे कमजोर हिस्सा दोबारा धंस गया और तटबंध भी ढह गया। विभागीय टीम तटबंध को दोबारा मजबूत करने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने में जुटी है।
