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    जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवन गिराने के आदेश के खिलाफ कोर्ट पहुंचा प्रबंधन, कमिश्नर की अदालत में दी चुनौती

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 07:22 PM (IST)

    जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रामपुर विकास प्राधिकरण के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त आंजनेय कुमार के न्यायालय में अपील दायर की ...और पढ़ें

    आजम खान

    आजम खान

    जागरण संवाददाता, रामपुर। आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण संबंधी रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मंडलायुक्त आंजनेय कुमार के न्यायालय में अपील दायर कर दी है। हालांकि मंडलायुक्त के मेरठ में होने के कारण अभी उस पर सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है।

    दो पैन कार्ड के मामले में न्यायालय से दस वर्ष कैद की सजा सुनाए जाने के बाद पिछले वर्ष नवंबर से सपा नेता मोहम्मद आजम खां रामपुर जेल में निरुद्ध हैं। इस प्रकरण में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय में बिना मानचित्र के बनाए गए 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।

    इसको लेकर ये प्रकरण देश भर में सुर्खियां बटोर रहा है। 15 जुलाई को जारी ध्वस्तीकरण के आदेश का अनुपालन करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन का समय दिया गया है। इस आदेश के विरोध में तीन दिनों से विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

    सोमवार को विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं का एक पैनल मुरादाबाद में मंडलायुक्त आंजनेय कुमार के न्यायालय में ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पहुंचा। हालांकि, मंडलायुक्त कांवड़ यात्रा के संबंध में आयोजित बैठक में प्रतिभाग करने मेरठ गए थे। इसके चलते इस अपील पर सुनवाई नहीं हो सकी।

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    हालांकि, अधिवक्ताओं ने उनके न्यायालय में अपील दायर कर दी है। संभवत: मंगलवार को अपील पर सुनवाई शुरू हो जाएगी। रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 28 जून को विश्वविद्यालय में एक टीम भेजकर भवनों की नापजोख कराते हुए उनके मानचित्र तलब किए थे।

    मगर विश्वविद्यालय प्रबंधन कुल 40 भवनों में सिर्फ दो भवनों मेडिकल कालेज और अकादमी ब्लाक का मानचित्र ही प्रस्तुत कर पाया था। इस पर प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

    विश्वविद्यालय की ओर से डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ. नूर उल सलाम अपने अधिवक्ता नासिर सुल्तान के साथ उपस्थित होकर तर्क दिया था कि उक्त भवनों के निर्माण के समय प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं था। विश्वविद्यालय ग्राम पंचायत सींगनखेड़ा में स्थित है। ऐसे में प्राधिकरण को किसी भी तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

    जिलाधिकारी ने उनके तर्क को इस तथ्य के साथ खारिज कर दिया कि तब जिला पंचायत से मानचित्र स्वीकृत कराया जाना चाहिए था। यह भी कहा कि जौहर ट्रस्ट ने जिला पंचायत कार्यालय से विश्वविद्यालय के दो भवनों का मानचित्र स्वीकृत भी कराया था। इससे स्पष्ट है कि ट्रस्ट को नियमों की भलीभांति जानकारी थी। इसी आधार पर विश्वविद्यालय की दलील खारिज करते हुए अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण का फैसला सुनाया गया था।

    हाईकोर्ट का विकल्प बरकरार

    सपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता कासिफ खां ने बताया कि मंडलायुक्त के न्यायालय में दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद अगर आरडीए का आदेश निरस्त कर दिया जाता है तब ये प्रकरण यहीं समाप्त हो जाएगा। अगर न्यायालय संतुष्ट नहीं होता है और रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराता है तो उच्च न्यायालय में आदेश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी।

    जिन्हें तनखइया कहा, अब उनसे ही मांगने गए इंसाफ

    सपा नेता आजम खां ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी (आंजनेय कुमार सिंह) को तनखइया बोलते हुए जूते साफ कराने की बात कही थी। इस मामले में आजम खां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

    पिछली 16 मई को न्यायालय उन्हें दोषी ठहराते हुए दो वर्ष कैद की सजा भी सुना चुका है। अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद अब आजम खां का विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने भवनों को बचाने के लिए मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह से ही इंसाफ की गुहार लगाने गया है। इसको लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

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