कोरमा को पीछे छोड़ आगे निकला हब्शी हलवा, अब सात समंदर पार धूम मचाएगी रामपुर की शाही मिठाई
ODOC: रामपुर का प्रसिद्ध हब्शी हलवा अब 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना में शामिल हो गया है, जिससे इसे देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी। यह नवाबी दौर की 95 साल ...और पढ़ें

हवशी हलवा
HighLights
कैबिनेट में पास हुआ प्रस्ताव, हब्शी हलुए को मिली पहचान
संवाद सहयोगी, रामपुर। अब रामपुर के हब्शी हलुए को देश विदेश में पहचान मिलेगी।। हब्ब्शी हलुए को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्राडक्ट की तर्ज पर एक जनपद एक व्यंजन योजना में शामिल कर लिया है। कैबिनेट की बैठक में रामपुर के हब्शी हलुए को इस याेजना में शामिल करने को मंजूरी दे दी। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन योजना में रामपुर के हब्शी हलवा को शामिल किए जाने से यहां के दुकानदारों में खुशी का माहौल है।
एक जनपद-एक व्यंजन योजना के तहत प्रदेश सरकार खानपान की विशिष्ट परंपराओं को बढ़ावा दे रही है। शासन ने एक जनपद एक व्यंजन योजना के अंतर्गत सभी जिलों से प्रस्ताव मांगे थे। शासन का मानना था कि इससे प्रत्येक जिले के प्रोडेक्ट को नई पहचान मिलेगी। उपायुक्त उद्योग की ओर से इसका एक पत्र शासन को लिखकर भेजा गया था।
इसमें रामपुर के प्राचीन हब्शी हलवा को ओडीओसी में शामिल किए जाने की मांग की थी। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडीओपी 2.0 लांच किया तो उसमें रामपुर का हब्शी हलवा शामिल हो किया गया।
ओडीओसी में पहले रामपुरी कोरमा सेलेक्ट हुआ था, लेकिन इसमें यह सामने आया कि कोरमा तो हर जगह बनता है। हब्शी हलवा केवल रामपुर में बनता है। इसीलिए रामपुर की इस प्राचीन विरासत को पहचान दिलाने के लिए हब्शी हलवा का नाम आगे किया था।
रामपुर का हब्शी हलवा समेटे हैं 95 साल का इतिहास
हब्शी हलवा रामपुर शहर में कई दुकानों पर मिलता है। अब यह हलवा केवल रामपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इंग्लैंड, अमेरिका, ओमान, सऊदी अरब, मुंबई, लखनऊ, अलीगढ़ और पुणे तक इसकी डिमांड है। रामपुर में हब्शी हलवा की शुरुआत नवाब खानदान ने सन् 1930 के आसपास करवाई थी।
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जब बात रामपुर के जायके की आती है तो जेहन में बिरयानी और कबाब का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन रामपुर की एक और ऐसी मिठास है जिसके बिना यहां की दस्तरखान अधूरी मानी जाती है वह है हब्शी हलवा। अपने गहरे काले भूरे रंग और सोंधी खुशबू के लिए मशहूर यह हलवा न केवल स्वाद में बेमिसाल है। बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर है।
नवाबी दौर की मीठी विरासत
हब्शी हलवे का इतिहास रामपुर के नवाबों के दौर से जुड़ा है। इसे शाही हलवा भी कहा जाता है क्योंकि इसे तैयार करने में लगने वाली सामग्री और समय दोनों ही बहुत कीमती है। यह हलवा अपनी खास बनावट और कड़क सोंधेपन के लिए जाना जाता है। सर्दियों के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है। क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले मेवे और जड़ी-बूटियां शरीर को अंदरूनी गर्माहट देती हैं।
क्या है हब्शी हलवे की खासियत
रामपुर का हब्शी हलवा आम हलवों जैसा नरम नहीं होता बल्कि यह थोड़ा सख्त और दानेदार होता है। इसे बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत वाली है। कारीगर राजेश यादव ने बताया कि पारंपरिक रूप से इसे दूध को घंटों तक कड़ाही में जलाकर और उसमें अंकुरित गेहूं (समनक), घी, चीनी और ढेर सारे ड्राई फ्रूट्स डालकर तैयार किया जाता है। इसका गहरा रंग दूध के लगातार जलने और चीनी के कैरमलाइज होने से आता है।