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रामपुर जिला अस्पताल में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में लगे टांके, वीडियो वायरल होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप; जांच शुरू

Updated: Mon, 10 Aug 2026 08:58 PM (IST)

रामपुर जिला अस्पताल में बिजली गुल होने पर मोबाइल टॉर्च की रोशनी में घायल के टांके लगाने का वीडियो वायरल हुआ, जिस पर अपर निदेशक स्वास्थ्य ने जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर चालू होने में लगे समय और चार्जिंग बल्ब की अपर्याप्त रोशनी को कारण बताया।

जिला अस्पताल में मोबाइल की टार्च से इलाज करते स्वास्थ्य कर्मी। वायरल वीडियो

जिला अस्पताल में मोबाइल की टार्च से इलाज करते स्वास्थ्य कर्मी। वायरल वीडियो

HighLights

  1. जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली जाने पर टांके लगाने का वीडियो हुआ प्रसारित

जागरण संवाददाता, रामपुर। जिला अस्पताल में मोबाइल टार्च की रोशनी में घायल के टांके लगाते हुए वीडियो प्रसारित होने का मामला अपर निदेशक स्वास्थ्य तक पहुंच गया है। अपर निदेशक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रसारित वीडियो रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे का बताया जा रहा है।

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पैर में चोट लगने से घायल किशोर का इलाज किया जा रहा था। घाव गहरा होने पर उसके टांके लगाए जा रहे थे। इसी दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई। इमरजेंसी में रोशनी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने से अंधेरा छा गया। इस पर इलाज कर रहे स्टाफ ने तुरंत मोबाइल की टार्च जलाकर टांके लगाने पड़े।

इस दौरान किसी ने इसका वीडियो बना लिया और इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। प्रसारित वीडियो पर अपर निदेशक स्वास्थ्य मुरादाबाद का कार्यभार देख रहे डाॅ. प्रदीप वार्ष्णेय ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि यह गंभीर मामला है। सीएमओ द्वारा इसकी जांच कराई जाएगी।

इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस संबंध में सीएमएस डाॅ. बीसी सक्सेना का कहना है कि जिला अस्पताल की बिजली जाने पर जनरेटर चलाया जाता है। उसमें दो से तीन मिनट का समय लगता है। अस्पताल की इमरजेंसी में चार्जिंग बल्ब लगा है, लेकिन टांके लगाने के लिए उसकी रोशनी पर्याप्त न होने के कारण स्टाफ ने मोबाइल की टार्च जलाई थी।

टीबी मरीज को कर्मचारी ने दी दवा, पिता ने की शिकायत

जिला अस्पताल परिसर में स्थित डाट सेंटर पर दवा लेने आई युवती को कर्मचारी ने दवा दे दी। इस पर युवती के पिता ने नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दी। शिकायत पर जांच शुरू हुई तो सोमवार को टीबी अस्पताल में युवती और उसके पिता को बुलाया गया।

डाॅक्टर ने युवती की जांच की और दवाएं भी दीं। साथ ही युवती को पौष्टिक आहार की पोटली दी गई। शिकायतकर्ता श्याम सिंह ने बताया कि शिकायत के समाधान के लिए हमें बुलाया गया था, लेकिन सिर्फ डाक्टर द्वारा जांच करने व दवा देने से वह शिकायत के निस्तारण की सहमति नहीं दी जाएगी।

बेटी के स्वास्थ्य में सुधार होना जरूरी है। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. सत्य प्रकाश ने बताया कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों की जांच से लेकर इलाज तक निश्शुल्क है। मरीजों को पोषण भत्ता भी दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता की बेटी का भी मुफ्त इलाज किया जा रहा है।

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