एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण: रामपुर में बाजार दर पर मुआवजे की मांग, किसानों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण में पीपली नायक के किसानों ने सरकारी सर्किल रेट के बजाय बाजार दर पर मुआवजे की मांग की है।

HighLights
किसानों ने बाजार दर पर भूमि मुआवजे की मांग की।
2013 अधिनियम के तहत 100% अतिरिक्त प्रतिकर मांगा।
खड़ी फसल, पेड़, ट्यूबवेल का अलग से आकलन हो।
जागरण संवाददाता, रामपुर। गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच पीपली नायक के प्रभावित किसानों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सरकारी सर्किल रेट के बजाए बाजार दर के अनुसार मुआवजे की मांग उठाई हैं।
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण में उनके हितों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी तरीके से उचित प्रतिकर दिया जाए। हालांकि अभी भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
किसानों ने मांग की कि अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा सरकारी सर्किल रेट के बजाय बाजार दर के अनुसार निर्धारित किया जाए। ताकि उन्हें उनकी जमीन का उचित और अधिकतम प्रतिफल मिल सके। इसके साथ ही भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों के तहत सो प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने की मांग की।
ज्ञापन में किसानों ने अधिसूचना जारी होने से लेकर भूमि पर कब्जा लिए जाने तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिए जाने की भी मांग रखी। उनका कहना है कि भूमि का कब्जा लेने से पहले संबंधित किसान को मुआवजे की पूरी धनराशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
किसानों ने एक्सप्रेसवे निर्माण से प्रभावित खेतों के रास्ते बाधित होने की स्थिति में सर्विस रोड और अंडरपास की व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही बारिश के पानी की निकासी तथा खेतों की सिंचाई के लिए समुचित व्यवस्था किए जाने पर भी जोर दिया।
ज्ञापन में खेतों में मौजूद खड़ी फसल, पेड़, ट्यूबवेल, कुआं, सिंचाई व्यवस्था और अन्य स्थायी निर्माण का अलग से आकलन कर उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की।
किसानों ने उपजिलाधिकारी से सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। ज्ञापन देने वालों में सरजीत सिंह, राजपाल सिंह, जीवन सिंह, शीशपाल सिंह, कुन्ती देवी, रामकुंवर सिंह और मुहम्मद हनीफ आदि पीपली नायक के प्रभावित किसान शामिल रहे।
उप निबंधक हसीब अहमद ने बताया कि अपर जिला अधिकारी आनंद कुमार सिंह के आदेशानुसार अब केवल उन्हीं गाटा (खसरा) संख्याओं पर रोक लागू रहेगी। जो सीधे तौर पर एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रभावित हैं। बाकी जमीनों की रजिस्ट्री सामान्य रूप से की जा सकेगी। लेकिन कितने किसानों की जमीनें इसकी जद में हैं। अभी इसकी गणना नहीं की है।
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