इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की बदलेगी तस्वीर, सहारनपुर में अब 17 नहीं सिर्फ 6 गांवों पर नजर; इस कारण होगा यह बदलाव
Saharanpur Industrial Corridor: सहारनपुर में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए अब 17 की बजाय केवल छह गांवों की भूमि चिह्नित की जाएगी। अंतिम चयन किसानों की सहमति पर निर्भर करेगा।

सहारनपुर में औद्योगिक गलियारे के लिए अब केवल छह गांवों की भूमि होगी चिह्नित। (AI Generated Image)
HighLights
कनेक्टिविटी के अभाव में 11 गांव प्रस्तावित क्षेत्र से बाहर।
छह गांवों में समीक्षा व निरीक्षण के बाद होगा भूमि चयन।
संवाद सूत्र, रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए 17 गांवों की भूमि अब चिह्नित नहीं की जाएगी।
प्रस्तावित क्षेत्र में पर्याप्त कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने के कारण अब औद्योगिक क्षेत्र के लिए मात्र छह गांवों को ही चिह्नित किया गया है। हालांकि इन छह गांवों में भी अभी भूमि का अंतिम चयन नहीं हुआ है। विभिन्न स्तरों पर समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही भूमि को चिह्नित किया जाएगा।
दिल्ली देहरादून इकोनामिक काॅरिडोर से संपर्क क्षेत्र में शासन की योजना के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र बनना प्रस्तावित हुआ था। इसके क्रम में 23 मार्च 2026 को औद्योगिक क्षेत्र हेतु जमीन चिह्नित करने का आदेश किया गया।
जिसके क्रम में एसडीएम रामपुर मनिहारान द्वारा छह जुलाई को मौजा हलगोया अंबेहटा चांद, चकवाली, सिरसली कला, सिरसली खुर्द, मियानगी, मिर्जापुर, उमरी खुर्द,उमरी कला, बागाखेड़ी,मुंडी खेड़ी, अहमदपुर मस्त की भूमि की उपलब्धता के विषय में अवगत कराया गया।
जिसमें मुंडीखेड़ी,उमरी कला अंबेहटा चांद चकवाली, मिर्जापुर आदि गांव की लगभग 10 हजार बीघा भूमि को चिह्नित किया गया। लेकिन विभिन्न स्थल की समीक्षा व स्थलीय निरीक्षण में उक्त चिह्नित भूमि पर कनेक्टिविटी की उपलब्धता नियम अनुसार न होने के कारण उक्त भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। एसडीएम से पुनः औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन चिह्नित के लिए रिपोर्ट मांगी गई।
पुनः रिपोर्ट में गांव शिवदासपुर, नैनपुर नगला, मोहम्मदपुर गाडा, चकवाली, सिरसली कला, सिरसली खुर्द में लगभग 650 से 700 हेक्टयर भूमि को चिह्नित कर भेजा गया है। ओर गांव में भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए विभिन्न समीक्षा स्थलीय निरीक्षण के बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि इन गांव की भूमि औद्योगिक स्थल के लिए उपयुक्त है या नहीं।
यूपीसीडा के भूमि अध्यापति अधिकारी उमेश शुक्ला ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए जिन गांव की भूमि को प्रस्तावित किया जाता है।इन गांवों के परीक्षण उपरांत औद्योगिक क्षेत्र बनाने की दशा में सर्वप्रथम स्थानों से सहमति प्राप्त की जाती है। इसके बाद यदि 70 प्रतिशत किसान सहमत होते हैं तो भूमि के भू अर्जन की कार्रवाई होती है । भूमि का अंतिम चिह्नांकन समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही होगा।
किसानों की सहमति के बाद ही आगे बढ़ेगी भू-अर्जन की कार्रवाई
भूमि चिन्हित होने के बाद भी सीधे तौर पर किसानों की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। किसानों से सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भूमि लेने के लिए भू-अर्जन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। ऐसे में प्रस्तावित छह गांवों के किसानों के लिए आने वाले समय में समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के साथ-साथ सहमति की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
