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5 रुपये की लागत में ₹20 का नकली सिक्का, केमिकल की फिनिशिंग व असली जैसा वजन; छोटे में कम मार्जिन तो ढालने लगे बड़ा सिक्का

By Deepak Prajapati Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 14 Sep 2026 05:05 PM (IST)

Saharanpur News: सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो 5 रुपये की लागत में 20 ...और पढ़ें

आरोपितों से बरामद अधबने सिक्के व आरोपित पुलिस गिरफ्त में। जागरण

आरोपितों से बरामद अधबने सिक्के व आरोपित पुलिस गिरफ्त में। जागरण 

HighLights

  1. दो और पांच रुपये के सिक्के तैयार करने में भी करीब पांच रुपये की लागत

  2. उतनी ही लागत में बना रहे थे 20 रुपये के सिक्के, मेटल और फिनिशिंग में माहिर है आरोपित

दीपक प्रजापति, सहारनपुर। नकली सिक्के बनाने के खेल में आरोपितों ने मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब लगा रखा था। छोटे मूल्यवर्ग के सिक्कों में लागत अधिक और मुनाफा कम होने के कारण उन्होंने 20 रुपये के सिक्के तैयार करना शुरू कर दिया। पूछताछ में मुख्य आरोपित उपकार लूथरा ने बताया कि दो और पांच रुपये के सिक्के तैयार करने में भी करीब पांच रुपये तक का खर्च आता था, जबकि 20 रुपये के सिक्के को तैयार करने में भी लगभग इतनी ही लागत आती थी। ऐसे में 20 रुपये के सिक्के में मुनाफा कई गुना अधिक होने के कारण आरोपितों का फोकस इसी पर बढ़ता चला गया।

आमतौर पर असली और नकली की पहचान हो सकती है क्योंकि दोनों के बीच कई बिंदुओं पर अंतर पकड़ा जा सकता है लेकिन सहारनपुर पुलिस द्वारा पकड़े गए नकली नोट बनाने वाले गिरोह ने पुलिस को भी हैरान ही कर दिया। शुरूआत में तो पुलिस को नकली सिक्के हुबहु असली जैसे दिखे। असली सिक्के पर जिस तरह अशोक का चिन्ह होता है। सत्यमेव जयते लिखा होने के साथ साथ रुपये का चिन्ह भी होता है।

पुलिस का मानना है कि असली और नकली के बीच इतना कम अंतर और ऐसी सफाई पहली कभी नहीं देखी। सिक्के की चमक, आकार, वजन, छूने पर एहसास सब कुछ असली जैसा ही था। बताया जा रहा है कि आरोपित उपकार लूथरा को सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले मेटल से लेकर उसकी ढलाई, आकार और फिनिशिंग तक की जानकारी हो गई थी। यही वजह थी कि तैयार किए गए नकली सिक्के पहली नजर में असली जैसे दिखाई देते थे।

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आम लोगों के लिए उनके बीच अंतर कर पाना आसान नहीं था। सिक्के की बाहरी चमक और बनावट को असली सिक्के के करीब लाने के लिए फिनिशिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता था। बताया जा रहा है कि आरोपित उपकार लूथरा का भाई स्वीकार लूथरा भी दिल्ली में नकली सिक्कों को बनाने के मामले में ही पकड़ा गया था।

नकली सिक्कों को असली जैसा दिखाने के लिए केवल ढलाई और आकार पर ही ध्यान नहीं दिया जाता था। उनकी फिनिशिंग के लिए कई प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल किए जातेथे। इनकी मदद से सिक्कों की सतह और चमक को ऐसा रूप देने का प्रयास किया जाता था, जिससे सामान्य तौर पर देखने पर असली और नकली सिक्के में अंतर पकड़ना मुश्किल हो जाए।

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