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संभल में 19 साल से BSP का सियासी वनवास: 2007 के बाद नहीं खुला खाता, क्या 2027 में खत्म होगा सूखा?

Published: Thu, 22 Oct 2026 05:44 AM (IST)

संभल में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 2007 के बाद से कोई विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है, जबकि 2022 में ...और पढ़ें

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HighLights

  1. संभल में 44 हजार से अधिक वोट पाकर तीसरे स्थान पर रही बसपा, जनाधार को जीत में बदलने की चुनौती

सौरव प्रजापति, संभल। कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता की धुरी रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए संभल की सियासत में वापसी की राह लंबी होती जा रही है। जिले की चारों विधानसभा सीटों पर पार्टी को जीत का इंतजार है। वर्ष 2007 में चंदौसी सुरक्षित सीट पर मिली जीत के बाद से बसपा यहां विधानसभा चुनाव में अपना खाता नहीं खोल सकी है।

हालांकि, पिछले चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वोट मिल रहे हैं, लेकिन वे जीत की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में संगठन को मजबूत करना और मतों को जीत में बदलना बसपा के सामने बड़ी चुनौती है।

वर्ष 2007 में बसपा के गिरीश चंद्र ने चंदौसी सुरक्षित सीट पर सपा के सतीश प्रेमी को 7,282 वोटों से हराया था। गिरीश चंद्र को 40,335 वोट मिले थे और उनका मत प्रतिशत 36.19 रहा था।

इसके बाद से पार्टी जिले की चारों सीटों पर जीत से दूर है। लगातार चुनावी नाकामी के बीच बसपा के सामने अपना खोया राजनीतिक प्रभाव वापस पाने का सवाल खड़ा है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को संभल सीट पर 44,443, असमोली में 42,512 और चंदौसी में 30,481 वोट मिले थे। वहीं, गुन्नौर में पार्टी के खाते में 15,068 वोट आए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तीन सीटों पर पार्टी को उल्लेखनीय समर्थन मिला, लेकिन वह जीत में तब्दील नहीं हो सका। संभल विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी शकील अहमद को 2022 में 44,443 वोट मिले थे।

उनका मत प्रतिशत 18.24 रहा और वह तीसरे स्थान पर रहे। सपा के इकबाल महमूद 1,07,073 वोट पाकर विजयी हुए, जबकि भाजपा के राजेश सिंघल 65,376 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

सपा और बसपा के बीच 62 हजार से अधिक वोटों का अंतर रहा। यह अंतर बताता है कि बसपा को अपने मौजूदा मतदाताओं के साथ नए वर्गों तक भी पहुंच बनानी होगी।

चारों सीटों पर वापसी के लिए बसपा को संगठनात्मक मजबूती, प्रभावी प्रत्याशी चयन और व्यापक सामाजिक समीकरणों पर काम करना होगा। पार्टी के पास वोटों का आधार है, लेकिन उसे जीत में बदलने की रणनीति ही संभल में उसकी सियासी वापसी की दिशा तय करेगी।

तैयारी पूरी, 900 से अधिक बूथ अध्यक्ष, 160 सेक्टर अध्यक्ष नियुक्त : जिलाध्यक्ष

बसपा के जिलाध्यक्ष संसार सिंह का कहना है कि इस बार 2027 में पार्टी का दबदबा नजर आया। संभल की चारों विधानसभा चंदौसी, गुन्नौर, असमोली और संभल में 900 से अधिक बूथ अध्यक्ष बन गए हैं।

160 सेक्टर अध्यक्ष भी नियुक्त किए जा चुके हैं। चार विधानसभा की कमेटी और विधानसभा प्रभारी भी बन गए हैं। अब चुनावी माहौल बनने लगेगा।

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