'संभल में मारे गए 209 हिंदू, अब वापस आकर बसिए...' CM योगी के बयान के बाद 1978 के दंगे की फाइलें री-ओपन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद संभल में 1978 के दंगों की फाइलें फिर से खोली गई हैं, जिसमें 209 हिंदुओं की मौत का जिक्र है। इन दंगों के कारण ...और पढ़ें

संभल में हिंसा के दौरान फूंकी गई कार। जागरण आर्काइव
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कोतवाली के रजिस्टर में दर्ज हैं सिर्फ नौ मौतें, 24 नवंबर 2024 को हिंसा के बाद उठा पुराने दंगों का दंश
जागरण संवाददाता, संभल। 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे विरोध में भड़की हिंसा के बाद 1978 का दंगा भी ताजा हुआ था। शासन और प्रशासन ने जब उस समय के दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि विभिन्न अदालतों में विचाराधीन 1978 दंगे के 16 मुकदमे दर्ज किए थे।
आठ मुकदमों को तत्कालीन मुलायम सरकार ने वापस लिया था। अन्य मुकदमे पैरवी के अभाव व गवाहों के मुकरने से खत्म हो गए थे। यह जानकारी शासन द्वारा 23 दिसंबर 1993 को डीएम मुरादाबाद को लिखा पत्र सामने आई थी। जिसमें वापस लेने वाले मुकदमों की बिंदुवार जानकारी दी गई है।
पत्र की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं
बताया गया है कि पांच जनवरी 1994 को तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट में शासन के मुकदमे वापस लेने का पत्र दिया था। हालांकि, शासन के पत्र के बारे में कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है। संभल में 29 मार्च 1978 को हिंसा भड़की थी। दंगे के दौरान कई हिंदुओं को जिंदा जला दिया था। इसके बाद सैकड़ों हिंदू परिवारों ने पलायन कर दिया।
आदेश में मुकदमा अपराध संख्या- 89/78 एस. टी. नं. 402/78 राज्य बनाम मुनाजिर आदि, अपराध संख्या- 105/78 का मुकदमा राज्य बनाम इरफान आदि, अपराध संख्या 110/78 का राज्य बनाम इरफान का ही मुकदमा, अपराध संख्या- 113/78 राज्य बनाम गिनजार हुसैन आदि शामिल है।
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जलाए गए थे दर्जनों हिंंदु
संभल जिला प्रशासन शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी की थी। इस प्रकरण में मेरठ-सहारनपुर के एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा के द्वारा 17 दिसंबर को सदन में विधान परिषद सत्र के दौरान कहा गया था कि सन 1978 में संभल में हुए सांप्रदायिक दंगों के कारण दर्जनों हिंदुओं को जिंदा जलाया गया था।
सैकड़ों लोगों की हत्या कर उनके मकान एवं दुकानों पर कब्जा कर लिया गया था। इस कारण सैकड़ों हिंदू परिवार पलायन करने के लिए मजबूर हो गए थे, जिन्हें आज तक न्याय नहीं मिला और हाल ही में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाते समय वहां एक मंदिर भी मिला है, जिस पर 46 वर्षों से ताला लगा हुआ था।
संभल प्रशासन ने मांगी दंगे की आख्या
इसके प्रांगण पर लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसी सिलसिले में शासन ने संभल प्रशासन को एक पत्र जारी कर उस दंगे की आख्या मांगी है। जिसे सात दिन में प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आख्या के लिए शासन से अपर पुलिस अधीक्षक को नामित किया है।
फिर पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई की तरफ से तत्कालीन डीएम को लिखे गए पत्र पर संयुक्त जांच के लिए डीएम ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को नामित किया था। खास बात यह है कि उस दंगे से जुड़े अभिलेख अभी तक सामने नहीं आए हैं। सिर्फ कोतवाली में एक रजिस्टर है, जिसमें नौ लोगों की मौत का जिक्र है।
40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूर्व में विधानसभा में संभल दंगे पर बयान दिया था। कहा था कि 1947 से लेकर अभी तक संभल में 209 हिंदुओं की जान दंगों के चलते गई है। संभल में 29 मार्च 1978 को दंगे के दौरान आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस घटना में कई हिंदू मारे गए।
विभिन्न अदालतों में विचारधीन 16 में से आठ मुकदमों को वर्ष 1994 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने वापस ले लिया था। अन्य मुकदमे पैरवी के अभाव व गवाहों के मुकरने से खत्म हो गए। भय के चलते 40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा था। पलायन के गवाह अभी मौजूद हैं। मंदिर में कोई पूजा करने वाला बचा नहीं था।
1978 के दंगे में संभल कई दिन झुलसा था। इससे लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। शहर में असुरक्षा का माहौल बन गया था। इसके बाद हिंदू संप्रदाय के लोग औने पाैने दामों पर अपने मकान बेचकर दूसरे शहरों और मुहल्लों में चले गए थे। घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद अधिकारियों ने सभी दंगा पीड़िताें से मुलाकात की थी।
मुख्यमंत्री बोले थे वापस आइए संभल : विनीत गोयल
1978 के दंगे में फड़ स्वामी बनवारी लाल गोयल को जिंदा जला दिया था। उनके पुत्र विनीत गोयल का कहना है कि वह दंगे के बाद शहर छोड़क दिल्ली चले गए थे। संभल आते-जाते हैं मगर, बसे नहीं हैं। हिंसा के बाद जब न्यायिक आयोग संभल में पहुंचा तो उन्होंने भी अपने बयान दर्ज करवाए थे।
उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। तब मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि अब आप वापस संभल आकर बसिएगा, क्योंकि माहौल सुरक्षित हो गया है। विनीत गोयल का कहना है कि वह वापस आने का विचार करेंगे लेकिन, शासन-प्रशासन से कोई जमीन आदि नहीं चाहिए।