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    सावधान किसान! कोहरे की चादर में छिपा है आलू का 'दुश्मन', ऐसे बचाएं अपनी फसल

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 07:48 PM (IST)

    संभल जिले में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा बढ़ गया है, खासकर पिछेती बोआई वाले आलू के लिए। जिला उद्यान अधिकारी ने किसा ...और पढ़ें

    आलू की फसल

    आलू की फसल

    HighLights

    1. जिले में करीब 45 हजार हेक्टेयर में की गई है आलू की फसल, संभल और चंदौसी तहसील क्षेत्र में होता है सबसे अधिक उत्पादन

    संवाद सहयोगी, जागरण, चंदौसी। जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। गलन के साथ कोहरा भी खूब पड़ रहा है। घना कोहरा आलू की फसल के लिए घातक हो सकता है। ऐसे में वे किसान ज्यादा सतर्क रहें जिन्होंने आलू की पिछेती बोआई की है। आलू की पिछेती फसल में झुलसा बहुत गंभीर बीमारी है, जो सर्दी और कोहरे में तेजी से फैलती है। तापमान में गिरावट के कारण इस रोग के प्रकोप की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।

    जिले में इस बार लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की गई है। संभल और चंदौसी तहसील क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन करते हैं। जिला उद्यान अधिकारी सौरभ बंसल ने इस रोग के लक्षण और प्रबंधन के लिए किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी है।उन्होंने बताया कि सही समय पर प्रबंधन न करने पर आलू की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि झुलसा रोग लगने पर सबसे पहले पत्तियों के किनारों व ऊपरी भाग में पानी जैसे धब्बे दिखाई देते हैं, ये धब्बे तेजी से बढ़ते हैं और बाद में भूरे काले रंग के हो जाते हैं। पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफूंदीनुमा परत जम जाती है। रोग के अधिक प्रकोप होने पर आलू के कंदों पर काले धब्बे दिखाई देते हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ता है। इस लिए समय पर बचाव बेहद जरूरी है।

    झुलसा रोग लगने पर करें उपचार

    जिला कृषि अधिकारी प्रवोध कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में झुलसा रोग लगने पर मैंकोजेब 75 प्रतिशत 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरोथेलोनिल 75 प्रतिशत दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। रोग के अधिक लक्षण दिखाई देने पर मेटलैक्सिल आठ प्रतिशत, मैंकोजेब या डाईमेथोमॉर्फ 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करें।

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    उन्होंने बताया कि रोग को फैलने से रोकने के लिए फसल की सिंचाई करें और खेत में पानी न रुकने दें। संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें। उन्होंने बताया कि किसी भी दवा का छिड़काव करते समय साफ पानी का प्रयोग करें। सुबह या शाम के समय ही सावधानी से छिड़काव करें।


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