कम बारिश का अलर्ट! धान नहीं, इस बार ये फसलें बदलेंगी किसानों की किस्मत; बीज पर 50% छूट
मौसम विभाग द्वारा कम बारिश की संभावना के चलते कृषि विभाग ने किसानों को धान के बजाय दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाज की खेती करने की सलाह दी है। इन वैकल्पिक ...और पढ़ें

संभल में बारिश की फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, चंदौसी (संभल)। भले ही कुछ दिन पहले यहां झमाझम बारिश हुई हो लेकिन भारत मौसम विभाग यानी आइएमडी इस बार सामान्य से कम बारिश की संभावना जता चुका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान पूरे देश में बारिश इस साल सामान्य से कम रहने की संभावना है। अलनीनो के प्रभाव के कारण भी इस बार देशभर में कम बारिश और सूखे के हालात की आशंका जताई गई है।
ऐसे में धान उत्पादक किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। किसानों की इस परेशानी के मद्देनजर कृषि विभाग ने उन्हें धान के बजाय दलहनी और तिलहनी फसलों की तरफ ध्यान देने को कहा है। विभाग की ओर से इसके लिए बीजों पर अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जुलाई की शुरुआत में जिले में अच्छी बारिश हुई। पहले सप्ताह में दो दिन लगातार पानी बरसा। कुछ दिन पहले लगातार दो दिनों तक कभी हल्की तो कभी तेज बारिश हुई, लेकिन आने वाले समय में इसमें कमी की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल सामान्य से कम बारिश होगी। ऐसे में धान उत्पादक किसानों पर असर पड़ना भी तय है।
चूंकि धान की फसल में रोपाई से लेकर आखिर तक ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है और बारिश कम होने की दशा में किसान की उत्पादकता भी प्रभावित होगी। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों से केवल धान की फसल पर निर्भर न रहने की अपील की है।
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जिला कृषि अधिकारी प्रवोध कुमार मिश्रा ने बताया कि ऐसे में किसान दलहन जैसे मूंग, उर्द, तिलहन आदि की खेती पर ध्यान दें। किसान श्रीअन्न जैसे रागी, साबां, कोदो या फिर मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा आदि की भी खेती कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इनके बीजों पर विभाग द्वारा 50 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जा रहा है।
लागत और मेहनत कम, मुनाफा ज्यादा
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, धान के मुकाबले इन फसलों में लागत और मेहनत कम है जबकि मुनाफा दोगुना या उससे भी ज्यादा है। धान की फसल में जहां ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है, वहीं इन फसलों में बहुत कम पानी से काम चल जाता है। उर्वरकों की भी जरूरत काफी कम होने से किसान को ज्यादा लाभ मिलता है।