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    संभल में बड़ा खेल: 5 करोड़ की सरकारी जमीन को शहर इमाम ने बना दिया 'वक्फ संपत्ति', FIR दर्ज

    Updated: Sun, 31 May 2026 07:00 AM (IST)

    संभल में शहर इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई पर पांच करोड़ की सरकारी जमीन को राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अवैध रूप से वक्फ संपत्ति बनाने का आरोप है। पौध ...और पढ़ें

    संभल के सैफ खां सराय में ग्राम समाज की भूमि पर बना मकान और दरगाह का गेट जागरण

    संभल के सैफ खां सराय में ग्राम समाज की भूमि पर बना मकान और दरगाह का गेट जागरण

    HighLights

    1. राजस्व कर्मी की मिलीभगत से किया खेल, कब्जाई गई भूमि पर बने हैं मस्जिद-दरगाह और मकान

    जागरण संवाददाता, संभल। शहर से सटे गांव सैफ खां सराय में पौधरोपण के लिए आरक्षित ग्राम समाज की भूमि को शहर इमाम आफताब हुसैन ने अपने भाई मेहताब हुसैन और राजस्व कर्मी की मिलीभगत से पांच करोड़ की कीमत वाली 1340 वर्ग मीटर जमीन पर न सिर्फ अवैध कब्जा कर मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण किया बल्कि गलत तथ्यों के आधार से इस भूमि को वक्फ बोर्ड में भी दर्ज करवा दिया।

    जांच के बाद अब इस मामले में लेखपाल मुकेश कुमार यादव की तहरीर पर शहर इमाम, उनके भाई मेहताब हुसैन को नामजद करते हुए तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि वक्फ बोर्ड को गलत तथ्य देने के साथ ही चौहद्दी लिखकर दर्ज करा लिया।

    इस मामले में अब जांच शुरू हो गई है, जिसमें संलिप्त राजस्व कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। नगर कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में लेखपाल ने बताया कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गाटा संख्या 452 को पौधरोपण के लिए सार्वजनिक उपयोग को आरक्षित की गई थी। जिस पर कब्जा नियम विरुद्ध व अवैधानिक होता है।

    इतना ही नहीं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी न्यायालय द्वारा भूमिधरी का आदेश नहीं दिया जा सकता है। इसके बाद भी आफताब हुसैन व उनके भाई मेहताब हुसैन ने सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। वहीं ग्राम समाज की भूमि पर कब्जेदार किसानों के नाम खतौनी में श्रेणी चार में दर्ज किए जाते हैं।

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    ऐसे में फसली वर्ष 1410-1415 वर्ष में गाटा संख्या 452 पर श्रेणी चार में इनका नाम दर्ज कर लिया गया। इसी को लेकर वर्ष 2003 में 27 जनवरी को इन कब्जेदारों के नाम को खारिज कर राजस्व दस्तावेजों में भूमि ग्राम समाज के नाम से दर्ज कर दी गई थी।

    मगर भूमि के बेशकीमती होने के कारण इन भू माफियाओं ने अपना कब्जा बरकरार रखा और आरोपितों ने इसी कब्जे को लेकर वक्फ बोर्ड के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति का जिक्र न करके सिर्फ चौहद्दी वक्फ में पंजीकृत करा लिया।

    इसी को लेकर लेखपाल ने 24 जून 2025 को तहसीलदार न्यायालय में रिपोर्ट दायर करते हुए कहा कि गाटा संख्या 452 की 1340 वर्ग मीटर की ग्राम समाज के नाम से दर्ज भूमि पर आफताब हुसैन द्वारा अवैध कब्जा कर मकान, दरगाह और मस्जिद का निर्माण कर लिया है। फिर नोटिस जारी किए गए।

    18 जुलाई को आफताब हुसैन पक्ष ने नोटिस का जवाब देते हुए आपत्ति दर्ज कराई। जिसमें उन्होंने ग्राम समाज की नहीं बल्कि वफ्क संपत्ति होने का दावा किया। फिर तहसीलदार न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई लेकिन, आफताब हुसैन पक्ष के अधिवक्ता द्वारा स्वामित्व को लेकर कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

    इस पर तहसीलदार न्यायालय ने सात मार्च को बेदखली के नोटिस जारी करते हुए छह करोड़ 94 लाख 79 हजार का जुर्माना लगाया था। फिर जिलाधिकारी न्यायालय में अपील की गई। 22 मई को सुनवाई के बाद जिलाधिकारी ने फैसला सुरक्षित कर लिया।

    इस क्रम में अब ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने के लिए वक्फ बोर्ड के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत कर वक्फ में पंजीकरण कराने असंवैधानिक व विधि विरुद्ध कृत्यों के कारण आफताब हुसैन, मेहताब हुसैन निवासी सैफ खां सराय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

    एसपी केके विश्नोई ने बताया कि आफताब हुसैन व मेहताब हुसैन ने उस समय तैनात राजस्व कर्मियों के साथ मिलकर पांच करोड़ से अधिक की ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं यह भूमि पौधरोपण के लिए आरक्षित थी और इसके बाद भी अपने नाम में दर्ज करा लिया।

    उसके बाद वक्फ बोर्ड में फर्जी दस्तावेजों प्रस्तुत कर वक्फ संपत्ति घोषित करा दिया। लेखपाल व अन्य उच्चाधिकारियों द्वारा की गई जांच में सही बिंदु सामने आए हैं।

    तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में वक्फ बोर्ड में रिपोर्ट भेजी गई है। लेकिन, अभी वहां से कोई आदेश नहीं मिला है। उधर, इस संबंध में शहर इमाम व उनके भाई मेहताब हुसैन से बात करने का प्रयास किया गया मगर, उनके फोन स्विच आफ आए।

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