आयोग ने वीडियो क्लिप देखे, 71 उपद्रवियों के लिए बयान; संभल हिंसा की साजिश का सच ऐसे आया सामने
संभल हिंसा की जांच कर रहे आयोग ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और विभिन्न स्रोतों से मिली वीडियो क्लिप का विश्लेषण किया। ...और पढ़ें

संभल हिंसा।

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जागरण संवाददाता, संभल। संभल हिंसा की जांच के लिए आयोग ने न केवल पैदल घूमकर घटनास्थल का निरीक्षण किया था, बल्कि जहां पथराव हुआ था, वहां की संकरी गलियों का भी घूमकर जायजा लिया था। केवल इतना ही नहीं, हिंसा के तमाम साक्ष्य विभिन्न स्रोतों से मिलीं वीडियो क्लिप से भी जुटाए गए थे।
गठन के बाद आयोग के अध्यक्ष इलाहबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा समेत सदस्य सेवानिवृत्त आइएएस अमित मोहन प्रसाद व सेवानिवृत्त आइपीएस अरविंद कुमार जैन को इस घटना की सम्रग जांच का उत्तरदायित्व सौंपा गया था कि यह घटना अचानक थी, या किसी सोची समझी साजिश का परिणाम थी। कहीं इसे किसी योजनाबद्ध तरीके से तो अंजाम नहीं दिया गया था।
आयोग को इस बात का भी पता लगाना था कि ऐसी क्या परिस्थितियां थीं, जिनके कारण यह घटना हुई। खास बात ये भी थी कि इसके बाद आयोग को यह भी सुझाव देना था कि ऐसा क्या किया जाए कि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति भी न हो। इसके बाद जब 30 नवंबर-24 को आयोग पहले मुरादाबाद और फिर संभल पहुंचा तो पहले उन स्थानों को देखा गया, जहां पुलिस पर पथराव किया गया था। जामा मस्जिद तक जाने वाली संकरी गलियों पर भी नजर डाली गईं।
दिसंबर 2024 में हुई आयोग की पहली बैठक
छह दिसंबर को आयोग में कानूनी सलाहकार के रूप में सेवानिवृत्त जिला जज ब्रजेश कुमार को भी शामिल किया गया तो नौ दिसंबर-24 को आयोग की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें कानूनी सलाहकार ने एसपी से 15 जरूरी दस्तावेज मांगे।
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साथ ही निर्देशित किया गया कि हिंसा से संबंधित सभी मीडिया रिपोर्टस, चैट, वीडियो क्लिप आदि भेजे जाएं। आयोग ने सभी वीडियो क्लिप को ध्यान से देखा साथ ही मुरादाबाद जेल में बंद 71 आरोपितों के बयान वीडियो कांफेंसिंग के माध्यम से एक-एक करके दर्ज किए। बयान देने से पहले सभी आरोपितों को शपथ भी दिलाई गई थी।