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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sant Kabir Nagar News: पीपीपी मॉडल से इको टूरिज्म केंद्र बनेगा बखिरा झील, पर्यटन को लगेंगे पंख

    Updated: Sun, 24 Nov 2024 12:04 PM (IST)

    Bakhira Lake News Update संत कबीर नगर की बखिरा झील का विकास अब पीपीपी मॉडल पर होगा। झील के चारों ओर बांध और सड़क बनाई जाएगी। झील की करीब एक हजार हेक्ट ...और पढ़ें

    29 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली बखिरा झील। जागरण
    29 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली बखिरा झील। जागरण

    HighLights

    1. शासन ने पूछा कि झील के विकास की प्रगति, पीपीपी माडल की तैयार योजना का खाका भी मांगा
    2. बखिरा झील के चारों तरफ बांध, सोलर पावर हाउस, वाटर पार्क समेत अनेक परियोजनाओं पर होगा काम

    राज नारायण मिश्र, जागरण, संतकबीर नगर। बखिरा झील का सर्वांगीण विकास करके इसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बनाने की दिशा में नित नए कदम बढ़ रहे हैं। शासन ने झील के विकास की प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन से मांगी है। इसके साथ ही झील को सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी मॉडल) पर इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयार रूपरेखा पर भी चर्चा की है।

    पिछले कुछ महीनों से जिलाधिकारी झील के विकास के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी माडल अपनाकर यहां अनेक परियोजनाओं को जल्द ही आरंभ करवाया जा सकता है।

    इन परियोजनाओं पर होना है काम

    जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि इको पर्यटन विकास के लिए झील के चारों तरफ बांध व उस पर सड़क बनाना है। झील की करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि खाली है। यदि इस पर निजी सहयोग लेकर वाटर पार्क बनाया जाए तो यहां दूर-दूर से लोग आएंगे। झील के किनारे बिना उर्वरक के सब्जी और फल की खेती भी हो सकती है। झील का मनरेगा से सफाई का भी प्रस्ताव तैयार हुआ।

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    इसके साथ ही झील में गिरने वाले नालों के पानी पर भी मंथन हो रहा है। झील का पानी बाहर न निकले उसके लिए भी योजना बनी है। वाटर पार्क स्थापित कर यहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। पक्षियों की निजता को सुरक्षित रखते हुए नौकायन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    बखिरा झील में मौजूद प्रवासी पक्षी। जागरण


    ...ताे 30 गांव के लोगों को मिलेगी बिजली

    शासन को भेजे गए प्रस्ताव में झील के किनारे सोलर पावर प्लांट की भी योजना है। झील के डूब क्षेत्र के अलग उपलब्ध लगभग एक हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में से 250 एकड़ पर सोलर पावर हाउस स्थापित करके इससे उत्पादित बिजली आसपास के 30 गांव के लोगों को निश्शुल्क दिया जाएगा। शेष बिजली का व्यावसायिक प्रयोग करके प्राप्त आय को झील क्षेत्र के विकास में खर्च किया जाएगा। नेडा को जन सहभागिता के माध्यम से सोलर पावर हाउस का कार्य पूरा करवाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

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    बनेगा पाली हाउस, उगेगी सब्जी की फसल

    झील के कृषि योग्य भूमि पर पाली हाउस बनाकर आसपास के किसानों को संविदा पर खेती करने के लिए दिया जाएगा। यहां सब्जियों आदि की खेती होगी जो जिसमें जैविक उर्वरकों का ही प्रयोग होगा। जैविक उर्वरकों का उत्पादन भी झील में उपलब्ध वनस्पतियों से करने की योजना है।

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    34 वर्ष बाद बखिरा झील में चमकी विकास की बिजली

    1990 में केंद्र सरकार ने बखिरा के मोती झील को पक्षी बिहार घोषित किया था। लगभग 29 वर्ग किमी में फैली इस झील का क्षेत्रफल लगभग 2894.21 हेक्टेयर है। दो फरवरी 2022 को इसे रामसर साइट में शामिल किया गया। अब यह प्रदेश का 10वां रामसर साइट बन चुका है।

    इसमें एक आयाम और जोड़ते हुए सरकार ने इस वर्ष इसे राज्य पक्षी सारस अभयारण्य भी घोषित कर दिया है। झील के सीमांकन और इसमें पर्यटन विकास को लेकर प्रयास तो चलते रहे। अब लगभग 34 वर्षों बाद एक बार फिर विकास की उम्मीद जमीन पर उतरने की आस जगी है।

    प्रवासी पक्षियों का प्रवास स्थल है झील

    झील की पहचान यहां की जैव विविधताओं को लेकर विश्व स्तर पर है। यहां सवा सौ से अधिक प्रजातियों की पक्षियां और दुर्लभ कछुए आदि आकर्षण के केंद्र हैं। ठंड का आरंभ होते ही हजारों किमी की यात्रा करके पक्षियों के आने का सिलसिला आरंभ हो जाता है। इन पक्षियों की जल क्रीडा देखकर लोग अविभूत हो जाते हैं।