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जिसे सब समझते हैं कचरा, उसी 'नियारा' की राख से निकल रहा सोना-चांदी

Updated: Thu, 13 Aug 2026 02:39 PM (IST)

संतकबीरनगर के बखिरा में नियारा का कारोबार सैकड़ों परिवारों की आजीविका का साधन है, जहां सराफा की राख से सोना-चांदी निकाली जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया से निकलने वाले जहरीले धुएं से स्थानीय आबादी को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

13.62 टन नियारा की खेप पकड़े जाने के बाद सामने आया कारोबार का बड़ा नेटवर्क। जागरण

13.62 टन नियारा की खेप पकड़े जाने के बाद सामने आया कारोबार का बड़ा नेटवर्क। जागरण

HighLights

  1. बखिरा में सराफा राख से सोना-चांदी निकालने का अनूठा कारोबार।

  2. यह कारोबार सैकड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।

  3. भट्ठियों के धुएं से स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य को खतरा।

हरिशंकर साहनी, संतकबीरनगर। इन दिनों जिस नियारा (सराफा के कारखाने के कचरे, धूल या मिट्टी का वह भाग जिसमें सोने और चांदी के बहुत बारीक कण या घिसकर गिरे हुए अंश मिलते हैं) की चर्चा पूरे देश में हो रही है। इसका उपयोग और महत्ता जाननी हो तो संतकबीरनगर के बखिरा चले आइए। जिस राख को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, वहीं राख बखिरा के आसपास के आधा दर्जन गांवों के चार सौ परिवारों की आजीविका का साधन है।

सराफा दुकानों की धूल और राख में छिपे सोना-चांदी के कण यहां पहुंचते ही कारोबार का रूप ले लेते हैं। नगर पंचायत बखिरा के लेडुआ महुआ, अमरडोभा, गौरा, हारापट्टी, झुंगिया और सईबुजुर्ग गांवों में हजारों हाथ नियारा के कारोबार से जुड़े हैं। राख की खरीद, ढुलाई, धुलाई, प्रसंस्करण और धातु अलग करने तक कई स्तर पर रोजगार मिलता है।

नेपाल, महाराष्ट्र, बंगाल और मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से सराफा कारोबारियों की दुकानों की धूल और राख खरीदकर यहां लाई जाती है। पोखरों के किनारे विशेष प्रकार की चलनी से इसकी धुलाई होती है। एक टन राख की मात्रा घटकर जब चार-पांच किलोग्राम रह जाती है तो रसायन का प्रयोग कर इसे भट्ठी में गलाया जाता है। इस विशेष प्रसंस्करण प्रक्रिया के जरिए सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुएं अलग की जाती हैं। कम मात्रा में निकली कीमती धातु भी हजारों से लाखों रुपये की कीमत तक पहुंच जाती है।

सोनौली सीमा पर पर नियारा के साथ दो के पकड़े जाने के बाद चर्चा में आया धंधा
सोनौली में नेपाल से नियारा लेकर आ रहे ट्रक के पकड़े जाने के बाद बखिरा में चल रहा यह कारोबार चर्चा में है। आठ अगस्त की रात करीब 9:35 बजे कस्टम विभाग और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त टीम ने काठमांडू से सोनौली सीमा के रास्ते बखिरा आ रहे ट्रक को पकड़ा। ट्रक से करीब 13.62 टन नियारा बरामद हुआ।

ट्रक में सवार बहराइच निवासी मो. कामरान और बखिरा थाना क्षेत्र के लेडुआ महुआ निवासी सरीफ अहमद को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने नियारा को बखिरा निवासी आफताब आलम का बताया। ट्रक और नियारा जब्त कर दोनों को कस्टम विभाग ने नौतनवा कार्यालय के सिपुर्द कर दिया है। मामले की जांच चल रही है।

पोखरों के किनारे राख से निकलता है सोना
बखिरा के कई गांवों में पोखरों के किनारे नियारा की राख की धुलाई आम दृश्य है। दर्जनों युवक सुबह से शाम तक राख को पानी में धोकर उसमें मौजूद भारी कणों को अलग करते हैं। यह प्रक्रिया कई चरणों में चलती है। राख की मात्रा कम होने के बाद बची सामग्री को भट्ठी में गलाया जाता है। इसी प्रक्रिया में सोना-चांदी समेत अन्य धातुएं अलग होती हैं।

दिन-रात धधकती भट्ठियां, धुएं से आबादी परेशान
लेडुआ महुआ पावर हाउस और झुंगिया रोड पर आबादी के बीच नियारा गलाने वाली कई भट्ठियां दिन-रात धधकती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नियारा गलाने में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। इससे निकलने वाला धुआं आसपास के घरों तक पहुंचता है। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

ग्रामीणों ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल असर की आशंका जताते हुए आबादी के बीच चल रही भट्ठियों की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि कारोबार से रोजगार तो मिल रहा है, लेकिन नियमों की अनदेखी हुई तो यही रोजगार स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

बखिरा क्षेत्र में नियारिया का काम पहले लेडुआ महुआ,अमरडोभा,हारापट्टी,तरकुलवा,छोटी गौरा गांव व बड़ा गौरा गांव में होता था। वर्तमान में भी इसी स्थान पर हो रहा है। इसके साथ ही छोटे कारोबारी अपने घर पर ही सीमेंट का गड्ढ़ा बनवाकर उसी में नियारा का राख धोते है। नियारियों की सोना गलाने वाली भट्ठियां करीब 20 घंटे चलती है।

तेजाब व कई रासायनिक पदार्थ डालकर जलाई जा रही भट्टी से धुआं उठता हैं। सांस लेने में दिक्कत होती है। पहले भी कारोबारी जमीन में निजी गड्ढा खोदकर उसी में धुलाई करते थे,अब भी यही करते हैं। कुछ कारोबारी छोटे सीमेंटेड टैंक में धुलाई करते हैं। तालाब में राख झाड़ने पर उसके कण नीचे बैठ जाते हैं। सभी चिमनिया आबादी के पास है।

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क्या कहते हैं लोग ?
लेडुआ-महुआ के बसंत बेलदार ने कहा कि शाम के समय धुआं अधिक घना हो जाता है। आसपास का दृश्य साफ नहीं दिखता। सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यहीं के निवासी मुमताज अली ने कहा कि जहरीले धुआं से सांस फूलने लगता हैं। घर में महिलाओं व बच्चों का रहना दूभर हो गया है। इसकी शिकायत थाना व नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी से की गई लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की गयी।

जहरीले धुएं से खुजली,शरीर पर चकत्ता,दमा सहित अन्य स्वांस संबंधित बीमारी,गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इससे पानी भी दूषित हो जाता है। ऐसे पानी के नियमित सेवन करने से मस्तिष्क,दिल,गुर्दा पर प्रति प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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-डा.सबा नुसरत-प्रभारी चिकित्साधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ केंद्र-बखिरा।

वह नियारा के कारोबार और भट्ठियों के संचालन के संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करेंगे। नियम विरूद्ध गतिविधियां मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

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-सर्वदवन सिंह, सीओ-मेंहदावल।