संतकबीर नगर में बच्चों में बढ़ा वायरल संक्रमण, जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड ओवरफ्लो
संतकबीर नगर में मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड पूरी तरह भर गया है। ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, संतकबीर नगर। मौसम में लगातार बदलाव के कारण जिले में बच्चों में वायरल संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। बुखार, जुकाम, खांसी और सांस संबंधी बीमारियों की चपेट में बड़ी संख्या में नौनिहाल आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में संचालित 10 बेड वाला पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) वार्ड पूरी तरह भर चुका है। जगह न मिलने पर गंभीर बच्चों को रेफर किया जा रहा है, जिससे परिजन निजी अस्पतालों अथवा गोरखपुर का रुख करने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 200 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 70 प्रतिशत बच्चे तेज बुखार, गले में खराश, नाक बहना और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतों से पीड़ित हैं।
पीआईसीयू वार्ड के सभी बेड भरे होने के कारण यहां भर्ती बच्चों की हालत सामान्य होते ही उन्हें बगल के 30 बेड वाले पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। महुली क्षेत्र की रीमा देवी अपने तीन वर्षीय बेटे सलभ को लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं।
उन्होंने बताया कि बच्चे को तीन दिन से तेज बुखार है, जो दवा लेने के बाद भी नहीं उतर रहा था। डॉक्टरों ने भर्ती करने की सलाह दी, जिसके बाद किसी तरह पीआईसीयू में जगह मिल सकी। वहीं, मेंहदावल निवासी अजय कुमार के आठ माह के पुत्र शिवकुमार को निमोनिया होने पर कुछ घंटे तक बेड का इंतजार करना पड़ा।
आरएसवी और इन्फ्लूएंजा वायरस का बढ़ रहा असर
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. डीपी सिंह ने बताया कि कभी गर्मी तो कभी ठंडक जैसे मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है। अधिकांश बच्चों में आरएसवी और इन्फ्लूएंजा वायरस के लक्षण मिल रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में निमोनिया की शिकायत बढ़ रही है। बच्चों में दस्त, तेज बुखार, शरीर में अकड़न, उल्टी, दूध न पीना और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
चिकित्सकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीपी पांडेय ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें। बच्चों को अधिक तरल पदार्थ पिलाएं, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करें तथा संक्रमित बच्चों को स्कूल न भेजें। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, पसलियां चल रही हों या बच्चा अत्यधिक सुस्त हो जाए तो तुरंत अस्पताल लेकर आएं।
जिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए 10 बेड का पीआईसीयू वार्ड संचालित है। मरीजों की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
-डाॅ. रमाशंकर सिंह, सीएमएस