संत कबीर नगर: 'मगहर' की पावन समरसता से लेकर बखीरा झील, ओडीओपी और औद्योगिक क्रांति तक विकास की नई इबारत
संत कबीर नगर जिला, अपनी आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक सौहार्द के साथ, अब विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। मगहर की समरसता, बखीरा झील का इको-टूरिज् ...और पढ़ें

HighLights
मगहर: सामाजिक समरसता और कबीर की विरासत का प्रतीक।
बखीरा झील: रामसर साइट, इको-टूरिज्म का नया केंद्र।
ओडीओपी व इंफ्रास्ट्रक्चर से औद्योगिक विकास को गति।
डिजिटल डेस्क, संत कबीर नगर। उत्तर प्रदेश का संत कबीर नगर जिला, जो अपनी आध्यात्मिक जड़ों, सामाजिक सौहार्द और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है, आज प्रगति और आधुनिकता के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। वर्ष 1997 में अस्तित्व में आए इस जिले का नाम किसी राजा या साम्राज्य पर नहीं, बल्कि महान संत कबीर दास के नाम पर रखा गया है। 'जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान' का संदेश देने वाले संत कबीर की यह तपोभूमि आज धार्मिक कूपमंडूकता से परे हटकर बखीरा झील इको-टूरिज्म, खलीलाबाद के पावरलूम उद्योग, बखिरा के पीतल शिल्प और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर 'बढ़ते उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा का एक सशक्त उदाहरण पेश कर रही है।
सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मगहर और कबीर का कालजयी संदेश
संत कबीर नगर की आत्मा इसके ऐतिहासिक कस्बे 'मगहर' में बसती है। मगहर वही पावन धरा है, जहाँ संत कबीर ने अपने जीवन के अंतिम क्षण बिताए थे। उस दौर में प्रचलित अंधविश्वास कि 'काशी में मृत्यु से मोक्ष और मगहर में मृत्यु से नरक मिलता है' को तोड़ते हुए कबीर ने मगहर में अपने प्राण त्यागे थे। लोक मान्यताओं के अनुसार, उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शरीर के स्थान पर फूल मिले, जिन्हें हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों ने आपस में बाँटकर एक ही प्रांगण में समाधि और मज़ार का निर्माण कराया। आज मगहर का यह परिसर पूरी दुनिया को एकता, बंधुत्व और सामाजिक समरसता का अनुपम संदेश दे रहा है।
रामसर साइट से इको-टूरिज्म का नया केंद्र
जिले के मेहदावल क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बखीरा झील प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। लगभग 2900 हेक्टेयर में फैली इस विशाल आद्रभूमि (वेटलैंड) को अंतरराष्ट्रीय महत्व की 'रामसर साइट' का दर्जा प्राप्त हो चुका है। हर साल सर्दियों के मौसम में साइबेरिया और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके आने वाले प्रवासी पक्षियों और साइबेरियन सारस का यह पसंदीदा आशियाना बनती है। प्रदेश सरकार द्वारा यहाँ इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन विकसित करने के लिए नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे यह स्थल जल्द ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।
100 बेड का महिला अस्पताल और क्रिटिकल केयर
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के मामले में जिले ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल परिसर में पहले से मौजूद पुरुष अस्पताल के साथ ही 100 बिस्तरों का अत्याधुनिक महिला चिकित्सालय बनाकर जनता को समर्पित किया गया है। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट और मुफ्त डायलिसिस सेंटर की सुविधा शुरू की जा चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों को अब गोरखपुर या लखनऊ नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा, 100 बेड का नया क्रिटिकल केयर यूनिट भी निर्मित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में इस जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज के रूप में अपग्रेड होने की राह आसान होगी।
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मुख्यमंत्री कंपोजिट स्कूल और एजुकेशन हब
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए खतोली गाँव में 'मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण कराया गया है। इस मॉडल स्कूल का उद्देश्य ग्रामीण परिवेश के बच्चों को कॉन्वेंट स्तर की आधुनिक शिक्षा बेहद कम खर्च पर मुहैया कराना है। इसके अतिरिक्त, मेहदावल विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे जिले में राजकीय इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, आईटीआई और नर्सिंग कॉलेजों का जाल बिछाया गया है, जिससे संत कबीर नगर पूरे मंडल के लिए एक प्रमुख 'एजुकेशन हब' के रूप में पहचान बना रहा है।
ओडीओपी से मिला पारंपरिक उद्योगों को जीवन
संत कबीर नगर की आर्थिक रीढ़ यहाँ का पारंपरिक बखिरा पीतल बर्तन उद्योग और खलीलाबाद का पावरलूम व होजरी उद्योग है। 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत बखिरा के सदियों पुराने पीतल उद्योग को शामिल कर इसके विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मुरादाबाद की तर्ज पर यहाँ के बर्तनों का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात हो सके। इसके साथ ही मखलिसपुर क्षेत्र के ऊनी वस्त्र (वूलन) उद्योग और पारले एग्रो जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
एक्सप्रेसवे का संजाल, प्रस्तावित रेल लाइन और टाउनशिप डेवलपमेंट
जिले की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया गया है। गोरखपुर-अयोध्या-लखनऊ फोरलेन के साथ-साथ राम जानकी मार्ग, लिंक एक्सप्रेसवे और गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे इस जिले को सीधे जोड़ रहे हैं। रेलवे यातायात के विस्तार के लिए खलीलाबाद से बहराइच तक नई रेल लाइन परियोजना पर काम चल रहा है। इसके साथ ही, आवास विकास परिषद द्वारा किफायती आवास योजना और निजी क्षेत्र द्वारा मॉल, होटल व प्लॉट्स से लैस इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित की जा रही है, जो संत कबीर नगर को विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के संकल्प से सीधे जोड़ रही है।