यूपी में फ्री हुई बस सेवा तो मायके पहुंची बुजुर्ग महिलाएं, भाई की कलाई पर बांधी राखी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मिली मुफ्त बस यात्रा सुविधा से ...और पढ़ें

HighLights
बुजुर्ग महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा से मायके जाने का मौका मिला।
रक्षाबंधन पर सालों बाद भाइयों की कलाई पर बांधी राखी।
किराये की चिंता दूर होने से परिवारों में खुशी लौटी।
जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। उम्र के इस पड़ाव पर भी भाई की कलाई पर राखी बांधने की चाह कम नहीं हुई थी। बस मायका दूर था और आने-जाने का किराया जेब पर भारी पड़ता था। कई बार मन में राखी लेकर भाई के पास पहुंचने की इच्छा हुई, लेकिन साधन और खर्च की चिंता ने कदम रोक दिए।
इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की साधारण बसों में आजीवन निश्शुल्क यात्रा की सुविधा देने की पहल ने इन बहनों की राह आसान कर दी।
रक्षाबंधन पर बुजुर्ग महिलाएं सहयात्री के साथ बस में बैठीं और मायके पहुंचकर भाई की कलाई पर राखी बांधी। किसी की आंखों में खुशी थी तो किसी के चेहरे पर वर्षों बाद मायके पहुंचने की चमक।
रक्षाबंधन पर पहले दिन कई बुजुर्ग महिलाएं बसों में सफर करती नजर आईं। किसी के साथ बेटा था, किसी के साथ नाती-नतिनी तो कोई सहयात्री के साथ मायके की राह पर थी। सालों से दूरी और किराये के बीच दबकर रह गई राखी बांधने की इच्छा, इस बार पूरी हुई तो खुशी से आंखों से आंसू छलक पड़े।
नतिनी संग बस में बैठीं, भाई को राखी बांधी
खलीलाबाद शहर के समय माता मंदिर के निकट रहने वाली 60 वर्षीय इलायची देवी पत्नी चौथी का मायका मगहर में है। उन्होंने बताया कि साधन की परेशानी के कारण पिछले तीन वर्षों से रक्षाबंधन पर मायके नहीं जा सकी थीं। इस बार पड़ोस की महिला से निश्शुल्क बस यात्रा की जानकारी मिली तो उन्होंने देर नहीं की।
नतिनी को साथ लिया और खलीलाबाद से निगम की बस में बैठकर मगहर पहुंच गईं। भाई की कलाई पर राखी बांधी और अगले दिन वापस घर लौट आईं। उनका कहना था कि इस बार रक्षाबंधन उनके लिए फिर से बचपन जैसा बन गया।
दूरी और किराया नहीं बना बाधक, राखी बांध मिली अपार खुशियां
खलीलाबाद ब्लाक के औरंगाबाद गांव निवासी 61 वर्षीय कलावती देवी पत्नी सेतु प्रसाद का मायका धर्मसिंहवा में है। दूरी अधिक होने के साथ आने-जाने का किराया भी खर्चीला था।
उन्होंने बताया कि इसी वजह से कई बार रक्षाबंधन पर भाई के पास नहीं जा पाई थीं। इस बार बेटे के साथ रोडवेज बस से निश्शुल्क यात्रा कर मायके पहुंचीं। भाई को राखी बांधी और अगले दिन घर लौट आईं। उन्होंने कहा कि खुशी केवल उन्हें नहीं, बल्कि मायके के लोगों को भी हुई।
नाती का हाथ पकड़ा और चल पड़ीं मायके
कटबंध गांव निवासी 62 वर्षीय आशा देवी पत्नी बंशीधर सिंह का मायका धनघटा में है। रक्षाबंधन की सुबह वह नाती को साथ लेकर खलीलाबाद बाईपास पहुंचीं। वहां से निगम की बस में बैठकर मायके चली गईं।
भाई को राखी बांधते ही घर का माहौल खुशियों से भर गया। आशा देवी ने कहा कि सरकार की इस पहल से एक बहन की ही नहीं, पूरे परिवार की खुशी लौट आई।
मुफ्त सफर ने फिर जोड़ा मायके का रास्ता
खलीलाबाद के जनता मार्ग निवासी 61 वर्षीय आरती देवी पत्नी स्वर्गीय रामअवध यादव का मायका मुखलिसपुर में है। उन्होंने भी निश्शुल्क बस यात्रा का लाभ उठाकर मायके पहुंचकर भाई को राखी बांधी।
आरती देवी ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ आने-जाने में परेशानी होती है, ऐसे में निश्शुल्क बस यात्रा की सुविधा बुजुर्ग महिलाओं के लिए बड़ी राहत है।
