संत कबीर नगर: नौकरी छोड़ गांव लौटे यशोवर्धन, 500 एकड़ में मक्का उगाकर बदली किसानों की तकदीर
संत कबीर नगर के यशोवर्धन पांडे ने नौकरी छोड़कर गांव लौटकर 500 एकड़ में मक्का की खेती शुरू की, जिससे किसानों की आय बढ़ी और लागत घटी। उनके एफपीओ ने वैज् ...और पढ़ें

यशोवर्धन ने बदली तकदीर।
HighLights
यशोवर्धन ने नौकरी छोड़ 500 एकड़ में मक्का खेती की।
एफपीओ बनाकर किसानों की लागत घटाई, आय बढ़ाई।
वैज्ञानिक तकनीक से खेती कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदली।
दिलीप पाण्डेय, संतकबीर नगर। अधिकतर युवा बेहतर करियर के लिए महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं। इन सबके बीच संतकबीरनगर के नाथनगर ब्लॉक के तरयापार गांव निवासी यशोवर्धन पांडे ने खेती को अपना मिशन बनाया। गोरखपुर जनपद के फर्टिलाइजर नगर स्थित केंद्रीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट-लखनऊ से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद वह पीवीआर सिनेमाहाल-गोरखपुर में भी नौकरी की। उनका मन इसमें नहीं लगा। उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव के आसपास के किसानों के साथ मिलकर मक्का क्रांति की नई इबारत लिख रहे हैं। क्षेत्र में उत्पादित मक्का को इथेनॉल निर्माण के लिए गोरखपुर के गीडा स्थित आइजीएल कंपनी को भेजते हैं। इससे आय में भी काफी वृद्धि हुई है।
तीन वर्ष पूर्व बनाए एफपीओ
यशोवर्धन ने कहा कि वह मक्का में अपार संभावनाएं देखकर करीब तीन वर्ष पूर्व नाथनगर एग्री टेक्नोफेड फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी(एफपीओ)का गठन किया। उन्होंने नाथनगर ब्लाक के गायघाट गांव का चयन किया। यहां के किसान मुख्य रूप से धान,गेहूं,आलू आदि की खेती करते थे। उन्हें अच्छी कमाई प्राप्त करने के लिए मक्का की खेती की तरफ मोड़ा। उन्हें नई तकनीकों से परिचित कराकर और विभिन्न निजी बीज कंपनियों से संपर्क कर उच्च गुणवत्ता वाला मक्का बीज उपलब्ध कराए।
नई तकनीक से घट गई लागत
यशोवर्धन ने कहा कि पहले एक एकड़ मक्का की खेती पर 25 हजार से 30 हजार रुपये लागत पड़ता था। एफपीओ द्वारा विकसित मॉडल को अपनाने पर लागत घटकर प्रति एकड़ 15 हजार से 20 हजार रुपये हो गया। कम लागत में बेहतर पैदावार से किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ। पहली बार किसानों ने आधुनिक तकनीक से मक्का की सफल खेती देखी।
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फसल की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से कराई गई। इससे कटाई की समस्या दूर हो गई। कृषि विभाग के सहयोग से एफपीओ को बैच ड्रायर उपलब्ध कराया गया। इससे मक्का को वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जा रहा है। अफ्लाटाक्सिन का जोखिम कम हुआ।
सीएम योगी भी कर चुके हैं सम्मानित
यशोवर्धन ने कहा कि उनके एफपीओ ने करीब 500 एकड़ का एकीकृत मक्का क्लस्टर विकसित किया। उनके प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। उनके मक्का आधारित कार्यों पर दूरदर्शन ने विशेष कार्यक्रम तैयार किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जून 2026 को हैंसर बाजार ब्लाक के बसवारी गांव स्थित बैजूनाथधाम में उन्हें सम्मानित किया।
वहीं उपकार के निदेशक डॉ.संजय सिंह तथा कृषि विभाग के निदेशक पंकज त्रिपाठी ने फार्म एंड फूड मीडिया-दिल्ली का बेस्ट यंग फार्मर इन मार्केटिंग का अवार्ड उन्हें 30 जून 2026 को दिया। विश्व युवा केंद्र ने भी राज्य स्तर पर उनके एफपीओ को श्रेष्ठ एफपीओ के सम्मान से नवाजा जा चुका है।
यशोवर्धन पांडेय ने कहा कि यदि वैज्ञानिक तकनीक से खेती करें तो यह केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। उनके एफपीओ से जुड़े किसानों की पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है।
जिन्होंने परिवर्तन पर विश्वास किया। उसे अपने खेतों में उतारकर दिखाया। उनका एफपीओ पूर्वांचल में मक्का उत्पादन, वैज्ञानिक कृषि, नवाचार आधारित खेती व किसान संगठन के एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है। आने वाले वर्षों में हजारों किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।