घोटाले के आरोपी अधिकारी काे ही जांच टीम में कर दिया शामिल, शासन में अटकी कार्रवाई की फाइल
शाहजहांपुर स्वास्थ्य विभाग में ₹30 लाख के चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले की जांच समिति में प्रशासनिक अधिकारी रामकिशोर गौतम को शामिल किया गया है। गौतम स्व ...और पढ़ें

HighLights
आरोपी अधिकारी रामकिशोर गौतम जांच समिति में शामिल।
₹30 लाख चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले की हो रही जांच।
पूर्व में ₹5 करोड़ उपकरण खरीद घोटाले के आरोपी।
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। स्वास्थ्य विभाग में भी अजब खेल चल रहा है। 30 लाख रुपये के चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले के लिए जो जांच समिति गठित की गइ्र उसमें प्रशासनिक अधिकारी रामकिशोर गौतम को भी सदस्य बना दिया गया, जबकि वह स्वयं गत वर्ष हुए चिकित्सीय उपकरण खरीद घोटाले के आरोपित हैं।
सीएमओ डाॅ. विवेक मिश्र का कहना है कि अब तक कार्रवाई या दोष सिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए जांच सौंपने में कोई हर्ज नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2025 में चिकित्सीय उपकरणों की खरीद में घोटाला सामने आया था।
पूर्व सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने 31 जनवरी को अपनी सेवानिवृत्ति से दस दिन पूर्व 15 सीएचसी पीएचसी के लिए तय कीमत से कहीं अधिक मूल्य पर स्वास्थ्य उपकरण, बेड आदि सामान खरीद लिया था। आवश्यकता न होने के कारण इनको गोदाम में बंद कर दिया गया। पांच करोड़ का भुगतान भी निकाल लिया गया था। दस-दस रुपये वाले पेन 100 रुपये में खरीदे गए थे।
इस गड़बड़ी में दो डिप्टी सीएमओ समेत आठ कर्मचारी फंस गए थे, जिनमें प्रशासनिक अधिकारी रामकिशोर गौतम का भी नाम था। डीएम ने 100 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी की आशंका जताते हुए इन सभी के विरुद्ध अाठ अप्रैल को कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा था, लेकिन उसके बाद फाइल वही अटक गई। घोटाले में फंसे आरोपितों को भी विभाग ने तैनाती दे दी।
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अब चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाला सामने आया तो सीएमओ ने डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम बनाते हुए इसमें एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ. आर्येेंद्र के साथ रामकिशोर गौतम को भी शामिल कर दिया।
जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो बोले कि प्रशासनिक अधिकारी अभी दोष सिद्ध नहीं हुए हैं, इसलिए जांच टीम में उन्हें शामिल किया है। उन्होंने बताया कि टीम सोमवार से अपनी जांच शुरू करेगी। उसके बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
संविदा कर्मियों पर भी नजर
सीएमओ कार्यालय में कुछ संविदा कर्मियों का हस्तक्षेप अधिक बना हुआ है। यह कर्मचारी अपने तैनाती स्थल या पटल की बजाय विभाग के दूसरे कमकाज में ज्यादा दखंलदाजी करते हैं।
इससे पूर्व आशा कार्यकर्ताओं के प्रकरण में भी इन पर आरोप लगे थे, तब डीएम ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेेकिन विभाग में पैठ के चलते अपने आप को बचा ले गए। अब चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले में भी इनकी भूमिका की जांच हो सकती है।