शाहजहांपुर में धान खरीद का बड़ा 'खेल': आवक 20 लाख क्विंटल पार, कागजों पर 13 हजार और पोर्टल पर सिर्फ 3300
शाहजहांपुर में धान खरीद में भारी अनियमितता सामने आई है, जहां 20 लाख क्विंटल आवक के बावजूद सरकारी पोर्टल पर ...और पढ़ें

रोजा मंडी समिति में धान का लगा ढेर। जागरण
HighLights
20 लाख क्विंटल के पार धान की आवक, केंद्रों पर हो रही मनमानी
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। धान खरीद में सुस्ती बरकरार है, लेकिन कागजों पर आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 13 हजार क्विंटल से अधिक सरकारी खरीद का दावा किया जा रहा है, जबकि विभागीय पोर्टल पर महज 59 किसानों से 3300 क्विंटल खरीद ही दर्ज है। आंकड़ों में इस अंतर के पीछे विभागीय अधिकारी सत्यापन न होने को प्रमुख वजह बता रहे हैं।
मगर, बिना सत्यापन खरीद पर उनके पास संतोषजनक उत्तर नहीं है। धान खरीदने के लिए जिले में इस बार 223 क्रय केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन किसानों का धान अब भी नहीं तौला जा रहा।
जिले में धान की आवक 20 लाख क्विंटल के पार पहुंच चुकी है। अकेले अक्टूबर में अब तक 11 लाख क्विंटल से अधिक धान मंडियों में पहुंच चुका है। इसके बावजूद सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद की बेहद धीमी गति से हो रही है।
हरदोई व सांडी मंडियों के बंद रहने का असर रोजा मंडी में धान की आवक पर भी पड़ा है, लेकिन यहां भी किसानों को सरकारी खरीद का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

रोजा मंडी में विपणन शाखा के तीन क्रय केंद्रों पर खरीद बताई जा रही है। 23 अक्टूबर तक विपणन शाखा ने 1764 क्विंटल धान खरीदा था। 24 अक्टूबर को 24 किसानों से 1270 क्विंटल की खरीद दर्ज की गई।
वहीं, पीसीएफ के केंद्रों पर आनलाइन दर्ज खरीद अभी 200 क्विंटल का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी है। पीसीयू ने अब तक केवल एक किसान से 42 क्विंटल धान खरीदा है।सरकारी खरीद न होने का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है।
मंडी में खुले बाजार के व्यापारी धान 1800 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं, जबकि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल है।
ऐसे में किसानों को सरकारी मूल्य की तुलना में 491 से 641 रुपये प्रति क्विंटल तक कम मिल रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्र खुलने के बावजूद किसान अपना धान कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडे खरीद ने बताया कि इस बार वही किसान धान बेच सकते हैं, जिनका पोर्टल पर आनलाइन आवेदन व फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण है। इन किसानों को सत्यापन की आवश्यकता नहीं है।
पंजीकृत किसान के जनसेवा केंद्र से पोर्टल पर आवेदन करते ही सर्वे स्वत: सत्यापित हो जाता है। जबकि दूसरी व्यवस्था में आनलाइन आवेदन के बाद उपज के आधार पर लेखपाल से लेकर एडीएम तक की सत्यापन रिपोर्ट लगती है। ऐसे किसानों के सत्यापन नहीं हो पा रहे हैं। आवेदन व मानक के आधार पर खरीद कर ली जा रही है।
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