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स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा जुर्माना, बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा

Published: Sat, 05 Sep 2026 10:42 PM (IST)

जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 96,446 रुपये का जुर्माना लगाया है।

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HighLights

  1. स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर 96,446 रुपये का जुर्माना लगा।

  2. डिस्चार्ज कार्ड में कटिंग पर क्लेम खारिज करना गलत।

  3. उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार माना।

जागरण संवाददाता, शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी करार देते हुए 96 हजार का जुर्माना लगाया है।

इसमें उपभोक्ता को इलाज के खर्च के रूप में 41 हजार 446 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के एवज में 25 हजार रुपये, वाद व्यय पांच हजार और राजकोष में जमा कराने 25 हजार का अर्थदंड लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में धनराशि जमा न कराने पर कार्रवाई की जाएगी।

यह है पूरा मामला

शहर के धीमानपुर स्थित पेट्रोल पंप निवासी सचिन कुमार गुप्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 26 सितंबर को 2023 को वाद दायर किया था। इसमें उपभोक्ता ने अवगत कराया कि 26 सितंबर 2016 को स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से फैमिली हेल्थ आप्टिमा इंश्योरेंस प्लान लिया था।

परिवादी छह वर्षों से लगातार प्रीमियम का भुगतान कर रहा था और इस अवधि में एक भी क्लेम प्रस्तुत नहीं किया था। 26 जनवरी 2023 को परिवादी की पत्नी को प्रेग्नेंसी के चलते न्यू लाइफ हास्पिटल शामली में भर्ती कराया था। 31 जनवरी 2023 तक चले इस उपचार पर कुल 41 हजार 446 रुपये का चिकित्सीय व्यय आया था।

बताया कि अस्पताल से उपचार के उपरांत परिवादी ने बीमा कंपनी के समक्ष नियमानुसार क्लेम प्रस्तुत किया, जिसे कंपनी ने डिस्चार्ज कार्ड पर डेट आफ डिस्चार्ज में मामूली कटिंग और मिस रिप्रेजेंटेशन का अनुचित आधार बनाकर खारिज कर दिया।

हालांकि, संबंधित चिकित्सक ने अपनी मोहर और हस्ताक्षर से डिस्चार्ज तिथि को विधिवत प्रमाणित कर बीमा कंपनी को भेज दिया था। बावजूद इसके कंपनी ने 27 जून 2023 को क्लेम पूरी तरह से निरस्त कर दिया।

तीन सितंबर 2026 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने सदस्य अभिनव अग्रवाल और महिला सदस्य अमरजीत कौर की मौजूदगी में सुनवाई कर निर्णय सुनाया। जिसमें इसे सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया।

आयोग ने निर्णय में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी इस संपूर्ण फैसले का अनुपालन आगामी 45 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करे। ऐसा न करने की स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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