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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में 60 लाख रुपये का गबन, अधिशासी अभियंता समेत चार निलंबित

    Updated: Sun, 27 Apr 2025 04:20 PM (IST)

    डुमरियागंज विद्युत वितरण खंड में 60 लाख रुपये के गबन के मामले में प्रबंध निदेशक ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है ...और पढ़ें

    60 लाख के गबन में अधिशासी अभियंता समेत चार निलंबित। (प्रतीकात्मक तस्वीर) जागरण।
    60 लाख के गबन में अधिशासी अभियंता समेत चार निलंबित। (प्रतीकात्मक तस्वीर) जागरण।

    HighLights

    1. 60 लाख के गबन में अधिशासी अभियंता समेत चार निलंबित
    2. प्रबंध निदेशक ने की कार्रवाई, पीवीएनएल मिर्जापुर से संबद्ध हुए
    3. उत्तराखंड में तैनात कर्मचारी के निलंबन के लिए भेजा गया पत्र

    जागरण संवाददाता, डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। विद्युत वितरण खंड द्वितीय, डुमरियागंज में 60 लाख रुपये के गबन मामले में प्रबंध निदेशक ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। प्रबंध निदेशक की ओर से 25 अप्रैल को जारी आदेश में अधिशासी अभियंता राममूरत, सहायक अभियंता राजस्व सुनील कुमार श्रीवास्तव, उपखंड अधिकारी सरफराज अहमद अल्वी, कार्यालय सहायक संजय कुमार श्रीवास्तव को निलंबित करते हुए पूर्वांचल विद्युत निगम लिमिटेड मिर्जापुर से संबद्ध किया गया है।

    वर्तमान में उत्तराखंड में तैनात लेखाधिकारी सुजीत कुमार सोनकर के निलंबन का संस्तुति पत्र उत्तराखंड शासन को भेजा गया है। डुमरियागंज के विद्युत वितरण खंड, द्वितीय में एक अप्रैल 2022 से 30 अप्रैल 2023 के मध्य उपभोक्ताओं से बिजली बिल के 8.41 करोड़ रुपये संग्रहित किए गए थे।

    60 लाख का किया गया गबन

    इसके सापेक्ष 7.81 करोड़ रुपये ही राजस्व खाते में जमा हुए शेष 60 लाख रुपये जमा नहीं कराए गए। दैनिक जागरण ने 10 दिसंबर 2024 के अंक में पूरे मामले को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। मामला प्रकाश में आया तो तत्कालीन तकनीशियन मनोज कुमार पर विभाग ने मुकदजा दर्ज कराते हुए वेतन से वसूली का आदेश जारी कर दिया।

    इसके अलावा अधिशासी अभियंता संतोष कुमार त्रिपाठी के पत्र पर संग्रह कार्य के जिम्मेदारों तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता राजस्व, लेखाधिकारी, सहायक लेखाकार, राजस्व रोकड़िया, कार्यकारी सहायक राजस्व रोकड़िया के विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू हुई। जांच में उक्त सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय पाई गई, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई।

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