नेपाल आपदा में कैदियों ने बढ़ाए मदद का हाथ, 422 बंदियों ने जुटाए 66000 और चौकीदार ने 35111 किए डोनेट
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए तौलिहवा जेल के 422 कैदियों ने 66 ...और पढ़ें

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HighLights
नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए कैदियों ने की आर्थिक मदद।
तौलिहवा जेल के 422 बंदियों ने 66 हजार रुपये जुटाए।
चौकीदार प्रेमनाथ त्रिपाठी ने भी 35,111 रुपये का योगदान दिया।
कृष्ण पाल सिंह, शोहरतगढ़। नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ और आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कपिलवस्तु जिले की तौलिहवा जेल के कैदियों ने सराहनीय पहल की है। जेल के दो ब्लाक में बंद 422 कैदियों ने आपस में 66 हजार रुपये एकत्र कर प्रधानमंत्री दैवीय आपदा राहत कोष में जमा कराए। जेल के चौकीदार (मुख्य कैदी) प्रेमनाथ त्रिपाठी ने भी व्यक्तिगत रूप से 35111 रुपये का सहयोग दिया। इस तरह कुल 101111 रुपये राहत कोष में जमा किए गए।
नेपाल के भोटेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ और उससे हुई तबाही की खबरों ने जेल में बंद कैदियों को भी विचलित किया। आपदा में प्रभावित लोगों के घर-बार उजड़ने और परिवारों के संकट में आने की जानकारी मिलने के बाद कैदियों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करने का निर्णय लिया। किसी ने अपनी बची हुई रकम में से योगदान दिया तो किसी ने अपनी जरूरतों में कटौती कर राहत के लिए पैसे दिए।
गुरुवार को राहत राशि जमा करने के बाद उसकी रसीद (भौचर) प्रमुख जिला अधिकारी जनार्दन गौतम को सौंपा गया। जेल प्रशासन के अनुसार यह सहयोग कैदियों की स्वेच्छा से किया गया। खास बात यह रही कि जेल में बंद होने के बावजूद कैदियों ने आपदा में फंसे लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का परिचय दिया।
जरूरतमंदों तक पहुंचेगी मदद
तौलिहवा जेल में बंद 422 कैदियों की अपनी अलग-अलग परिस्थितियां और जीवन की कहानियां हैं। इसके बावजूद नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने सभी को एकजुट कर दिया। कैदियों ने माना कि आपदा के समय पीड़ित परिवारों को तत्काल मदद की जरूरत है। इसी भावना से उन्होंने सामूहिक रूप से राशि जुटाई।
चौकीदार प्रेमनाथ त्रिपाठी का योगदान भी इस पहल को खास बनाता है। उन्होंने कैदियों द्वारा जुटाई गई राशि से अलग अपनी ओर से 35,111 रुपये दिए। इस तरह जेल से निकली कुल एक लाख एक हजार 111 रुपये की मदद अब नेपाल के भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के राहत कार्य में उपयोग होगी।
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यह पहल बताती है कि जेल की चारदीवारी के भीतर रहने वाले लोग भी समाज के दुख-दर्द से अलग नहीं हैं। नेपाल की आपदा में तौलिहवा जेल के कैदियों की यह मदद पीड़ित परिवारों के लिए भले छोटी हो, लेकिन मानवीय संवेदना के लिहाज से इसका महत्व बड़ा है।
