सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक नवाचार को ब्रिटेन में मिला पेटेंट, जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी और वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों द्वारा विकसित नेचुरल पेस्टीसाइड डिस्पेंसिंग डिवाइस को यूके इंटेलेक्चु ...और पढ़ें

सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक नवाचार को ब्रिटेन में मिला पेटेंट।
HighLights
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के नवाचार को यूके में मिला पेटेंट।
नेचुरल पेस्टीसाइड डिस्पेंसिंग डिवाइस का डिजाइन पंजीकृत।
जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा इस तकनीक से।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी और वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों द्वारा विकसित नेचुरल पेस्टीसाइड डिस्पेंसिंग डिवाइस की डिजाइन को यूनाइटेड किंगडम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आफिस ने पेटेंट प्रदान किया है। डिजाइन का पंजीकरण होने के साथ ही विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।
इस नवाचार को जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कपिल गुप्ता, वनस्पति विज्ञान विभाग की डा. किरण गुप्ता तथा रामरतन कॉलेज, महराजगंज के कमलेश कुमार ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
यह उपकरण फसलों पर प्राकृतिक कीटनाशकों का समान, नियंत्रित और प्रभावी छिड़काव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे दवा की बर्बादी कम होगी, फसलों की सुरक्षा बेहतर होगी और पर्यावरण के अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजाइन के पेटेंट होने से प्राकृतिक कीटनाशकों के सुरक्षित और वैज्ञानिक उपयोग के लिए आधुनिक उपकरण विकसित करने की दिशा मजबूत होगी। साथ ही जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करने और बेहतर उपज प्राप्त करने में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे संस्थान में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी। यह सफलता विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित करेगी तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ करेगी। -प्रो. कविता शाह, कुलपति।