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नेपाल गए सिद्धार्थनगर के व्यापारी के बेटे की नदी में डूबने से मौत, शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम

Published: Sun, 30 Aug 2026 06:58 PM (GMT+05:30)

सिद्धार्थनगर के इटवा निवासी प्रभात सोनी की नेपाल में रक्षाबंधन के दौरान नदी में डूबने से मौत हो गई। उनके शव के घर पहुंचने पर परिवार में कोहराम मच गया।

इटवा में पूर्व मंत्री डा.सतीश द्विवेदी को पकड़कर रोते प्रभात के पिता अवधेश सोनी

इटवा में पूर्व मंत्री डा.सतीश द्विवेदी को पकड़कर रोते प्रभात के पिता अवधेश सोनी 

HighLights

  1. प्रभात सोनी की नेपाल में नदी में डूबने से मौत।

  2. रक्षाबंधन पर परिवार के साथ नेपाल गए थे युवक।

  3. शव घर पहुंचने पर परिवार में गहरा शोक छा गया।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। रक्षाबंधन की खुशियां लेकर नेपाल गए परिवार के लौटने की उम्मीद थी, लेकिन देर रात घर के दरवाजे पर जब 34 वर्षीय प्रभात सोनी का शव पहुंचा तो खुशियों की जगह चीख-पुकार ने ले ली।

वरिष्ठ स्वर्ण व्यवसायी अवधेश सोनी के जवान बेटे का शव देखते ही स्वजन बदहवास हो गए। घर पर मौजूद हर आंख नम थी और माहौल ऐसा कि ढांढस बंधाने पहुंचे लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके। कुछ देर बाद शव को अयोध्या ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया।

इटवा निवासी प्रभात सोनी शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी मां, बहन, छोटे भाई और मामा के परिवार के साथ नेपाल गए थे। शनिवार सुबह बुटवल में मंदिर दर्शन से पहले नदी किनारे नहाने के दौरान अचानक पानी की तेज धारा आई और पत्थर पर बैठे प्रभात को अपने साथ बहा ले गई।

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परिजनों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव के आगे बेबस रहे। बाद में घटनास्थल से करीब तीन-चार किलोमीटर दूर उनका शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रात करीब नौ बजे शव इटवा स्थित आवास पर पहुंचा। शव देखते ही मां और पिता की आंखों के सामने जैसे दुनिया थम गई।

दोनों बेटे को पुकारते हुए बिलख पड़े। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। कुछ दिन पहले तक रक्षाबंधन की खुशियों में शामिल परिवार अब एक ऐसे दुख के बीच खड़ा था, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। प्रभात की चार वर्ष और डेढ़ वर्ष की दो मासूम बेटियां भी घर में थीं।

उन्हें शायद इस बात का अहसास तक नहीं था कि पिता अब कभी लौटकर उन्हें गोद में नहीं उठाएंगे। बच्चियों को गोद में लेकर स्वजन फूट-फूटकर रोते रहे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी छलक उठीं।

कुछ देर घर पर अंतिम दर्शन के बाद शव को अयोध्या ले जाया गया। वहां रात में ही अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में स्वजन और रिश्तेदारों के साथ बड़ी संख्या में व्यापारी व कस्बावासी शामिल हुए। कस्बे में भी घटना को लेकर शोक का माहौल रहा।

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